Gardening Tips: गमले में पौधा लगाने के बाद उसकी अच्छी ग्रोथ के लिए सिर्फ पानी देना काफी नहीं होता। मिट्टी की स्थिति, पोषण, धूप और ड्रेनेज जैसी कई चीजें पौधे की सेहत पर असर डालती हैं। अगर पत्तियां लगातार पीली हो रही हैं या पौधे में कलियां कम आ रही हैं, तो सबसे पहले मिट्टी और उसकी पोषण जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।
सबसे पहले मिट्टी की गुड़ाई करें
खाद देने से पहले गमले की ऊपरी मिट्टी को हल्के हाथों से ढीला करें। मिट्टी बहुत सख्त होने पर पानी और पोषक तत्व जड़ों तक ठीक से नहीं पहुंच पाते। हालांकि गुड़ाई करते समय जड़ों को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखें।
जैविक खाद से दें पोषण
मिट्टी को ढीला करने के बाद अच्छी तरह पकी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाई जा सकती है। खाद की मात्रा पौधे और गमले के आकार के हिसाब से रखें। जरूरत से ज्यादा खाद डालने से फायदा होने के बजाय जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पैकेज पर दिए निर्देश या पौधे की जरूरत के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करें।
नीम खली और दूसरी खाद का इस्तेमाल
पौधों की देखभाल में नीम खली का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकती है। बोनमील जैसी खाद का इस्तेमाल भी कुछ फूल वाले पौधों में पोषण देने के लिए किया जाता है। लेकिन अलग-अलग खाद एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा में डालने के बजाय उनकी जरूरत और उपयोग के निर्देश को समझना जरूरी है।
सीवीड एक्सट्रैक्ट भी कर सकते हैं इस्तेमाल
सीवीड एक्सट्रैक्ट को पौधों के लिए एक सपोर्टिव न्यूट्रिएंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसे मिट्टी में देने या पत्तियों पर स्प्रे करने से पहले प्रोडक्ट के लेबल पर दिए डाइल्यूशन निर्देश जरूर देखें। सामान्य तौर पर ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से बेहतर परिणाम नहीं मिलते, इसलिए निर्धारित अनुपात का पालन करना जरूरी है।
फूलों के लिए सिर्फ खाद नहीं, ये बातें भी जरूरी
अगर पौधे में फूल नहीं आ रहे हैं तो केवल खाद बढ़ाना समाधान नहीं है। पौधे को उसकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त रोशनी मिल रही है या नहीं, यह भी देखें। गमले में पानी जमा न हो और ड्रेनेज होल खुले रहें। सूखी या खराब पत्तियों को समय-समय पर हटा सकते हैं। साथ ही कीटों के लक्षण दिखाई दें तो समय रहते उनकी पहचान कर उचित उपाय करें।
पौधे की पत्तियां लगातार पीली रहें, ग्रोथ पूरी तरह रुक जाए या जड़ें सड़ने लगें, तो खाद बढ़ाने के बजाय पहले पानी, रोशनी, मिट्टी और ड्रेनेज की स्थिति जांचना ज्यादा जरूरी है।






