रायपुर। Nishaanebaz.com-Fake Medical Stipend Order: छत्तीसगढ़ के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉक्टरों के स्टाइपेंड तथा मानदेय-वेतन में भारी बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा कथित शासकीय आदेश पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत निकला है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस वायरल पत्र का आधिकारिक खंडन किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा यह दस्तावेज शासन या विभाग द्वारा जारी नहीं किया गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह भ्रामक दस्तावेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रहे इस कथित शासकीय आदेश में दावा किया गया था कि राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पदस्थ जूनियर रेजिडेंट, प्रदर्शक (डेमॉस्ट्रेटर) और स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के स्टाइपेंड एवं मानदेय में संशोधित बढ़ोतरी की गई है। इस फर्जी पत्र में डॉक्टरों को प्रति माह 73,152 रुपये दिए जाने और यह संशोधित दर 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होने का उल्लेख किया गया था, जिससे चिकित्सक वर्ग और छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई थी।
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मामला सामने आने और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचने के तुरंत बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्थिति साफ की। विभाग ने स्पष्ट लहजे में कहा कि शासन स्तर पर ऐसा कोई भी आदेश या निर्णय जारी नहीं किया गया है। वायरल हो रहे दस्तावेज को पूरी तरह फर्जी, असत्य और कूटरचित करार देते हुए विभाग ने राज्य के सभी चिकित्सकों, चिकित्सा विद्यार्थियों, रेजिडेंट डॉक्टरों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी भ्रामक व अप्रामाणिक पत्र पर बिल्कुल भरोसा न करें।
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चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसी भी शासकीय आदेश, नीतिगत निर्णय या आधिकारिक घोषणा की सत्यता की पुष्टि केवल सरकार के अधिकृत चैनलों, विभागीय वेबसाइट या आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से ही की जानी चाहिए। इसके साथ ही विभाग ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के फर्जी और एआई-जनरेटेड सरकारी दस्तावेजों को वास्तविक मानकर आगे शेयर करना या अफवाह फैलाना कानूनी रूप से गलत है, इसलिए इसे आगे प्रसारित करने से बचें।






