Health Tips: मोबाइल फोन आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है और कई लोग इसे आसानी से पहुंच में रखने के लिए शर्ट या जैकेट की जेब में रखते हैं। बाईं तरफ की जेब दिल के पास होने की वजह से कुछ लोगों को चिंता रहती है कि फोन के सिग्नल या वाइब्रेशन से हार्टबीट पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सामान्य व्यक्ति में सिर्फ फोन को शर्ट की जेब में रखने से हार्टबीट बदलने का कोई पक्का निष्कर्ष नहीं है। फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा नॉन-आयनाइजिंग होती है और इसे एक्स-रे जैसी आयनाइजिंग रेडिएशन समझना सही नहीं है।
जेब में फोन वाइब्रेट हो तो धड़कन क्यों महसूस होती है?
कभी-कभी जेब में फोन के वाइब्रेट होने पर ऐसा महसूस हो सकता है कि दिल की धड़कन अचानक ज्यादा तेज या अलग हो गई है। लेकिन वाइब्रेशन महसूस होना अपने आप में हार्ट रिदम बदलने का प्रमाण नहीं है। कई बार शरीर के किसी हिस्से में होने वाली सामान्य सेंसेशन पर हमारा ध्यान ज्यादा चला जाता है और धड़कन भी अधिक महसूस होने लगती है। हार्ट पैल्पिटेशन यानी दिल की धड़कन तेज, जोर से या अनियमित महसूस होने के कई कारण हो सकते हैं।
पेसमेकर वालों को फोन से रखनी चाहिए दूरी
यह सावधानी उन लोगों के लिए खास तौर पर जरूरी है जिनके शरीर में पेसमेकर या इम्प्लांटेबल कार्डियक डिफिब्रिलेटर जैसे उपकरण लगे हैं। कुछ मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद मजबूत मैग्नेट ऐसे इम्प्लांटेड डिवाइस के काम में अस्थायी हस्तक्षेप कर सकते हैं। FDA ऐसे लोगों को फोन और इम्प्लांटेड डिवाइस के बीच कम से कम 6 इंच यानी करीब 15 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह देता है। फोन को उस जेब में रखने से भी बचना चाहिए जो सीधे इम्प्लांट के ऊपर हो।
बार-बार धड़कन तेज हो तो सिर्फ फोन को जिम्मेदार न मानें
अगर फोन जेब में रखने के बाद कभी धड़कन तेज महसूस हो तो तुरंत इसका कारण मोबाइल को मान लेना सही नहीं है। तनाव, कैफीन, कम नींद और कुछ हृदय संबंधी रिदम समस्याएं भी पैल्पिटेशन की वजह बन सकती हैं। बार-बार ऐसी शिकायत होने पर कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है।
तुरंत लें मेडिकल मदद
अगर तेज या अनियमित धड़कन के साथ सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, चक्कर या बेहोशी जैसी समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। सिर्फ फोन को जेब से निकाल देना इसका इलाज नहीं है।






