CEC Gyanesh Kumar: नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए कदमों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया भी चर्चा में है। CEC को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों की तुलना में काफी कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
क्या है CEC को हटाने का नियम?
मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद की प्रक्रिया के जरिए हटाया जा सकता है। इसके लिए हटाने का प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है। नोटिस लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति को दिया जाता है।
नोटिस के लिए न्यूनतम सांसदों का समर्थन भी जरूरी है। लोकसभा में कम से कम 100 सांसद और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इसके बाद संबंधित पीठासीन अधिकारी यह तय करते हैं कि प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं।
नोटिस स्वीकार होने के बाद क्या होता है?
यदि नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है। CEC को हटाने की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने से जुड़ी व्यवस्था लागू होती है। कानून के तहत जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट संसद के संबंधित सदन के सामने रखती है। यदि समिति आरोपों को सिद्ध मानती है, तो प्रस्ताव आगे संसद में चर्चा और मतदान के चरण में पहुंचता है।
दोनों सदनों में पारित होना जरूरी
CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत के साथ पारित होना जरूरी है। संविधान के तहत इस प्रक्रिया में दोनों सदनों की भूमिका अहम होती है। इसके बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास जाता है और राष्ट्रपति के आदेश के बाद CEC को पद से हटाया जा सकता है।
अब तक क्या हुआ?
मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए थे। इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए थे।
हालांकि, 6 अप्रैल 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। दोनों सदनों की ओर से जारी आदेशों में कहा गया कि नोटिस पर विचार और संबंधित पहलुओं के आकलन के बाद उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
इसलिए फिलहाल वह प्रक्रिया जांच समिति और संसद में मतदान के चरण तक नहीं पहुंची।
CEC Gyanesh Kumar: क्यों खास है यह प्रक्रिया?
CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। CEC को हटाने की प्रक्रिया को जानबूझकर कठिन रखा गया है, ताकि निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता बनी रहे। इसी वजह से केवल राजनीतिक असहमति या आरोप लगना पर्याप्त नहीं होता; संवैधानिक प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव, जांच और संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होती है।






