Mahadevsal Railway Station: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- देश में रेलवे स्टेशनों पर आमतौर पर टिकट काउंटर और बुकिंग कर्मचारी मौजूद रहते हैं, लेकिन झारखंड में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है, जहां ट्रेनें रुकती हैं और यात्री सफर के लिए चढ़ते हैं, फिर भी नियमित टिकट बिक्री की व्यवस्था नहीं है। यह स्टेशन है पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड में स्थित महादेवसाल हॉल्ट। यहां रोजाना करीब छह ट्रेनों का ठहराव होता है, लेकिन नियमित बुकिंग क्लर्क नहीं होने के कारण यात्री स्टेशन से टिकट नहीं खरीद पाते।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि स्टेशन पर टिकट काउंटर न होने का मतलब यह नहीं है कि यात्री बिना टिकट यात्रा कर सकते हैं। यात्रियों को रेलवे के नियमों के अनुसार वैध टिकट लेकर ही सफर करना होता है।
ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन टिकट नहीं मिलता
महादेवसाल हॉल्ट दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत आता है। यह चक्रधरपुर-राउरकेला रेलखंड पर स्थित है और चक्रधरपुर से इसकी दूरी करीब 40 किलोमीटर है।इस स्टेशन पर चक्रधरपुर-राउरकेला पैसेंजर, टाटा-इतवारी पैसेंजर और टाटा-बिलासपुर पैसेंजर सहित करीब आधा दर्जन ट्रेनें रुकती हैं। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री यहां से ट्रेन में चढ़ते और उतरते हैं।स्टेशन पर टिकट काउंटर बना हुआ है, लेकिन वहां नियमित बुकिंग क्लर्क की तैनाती नहीं है। इसी वजह से सामान्य दिनों में यहां टिकट खरीदने की सुविधा उपलब्ध नहीं रहती।
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डीआरएम के निरीक्षण में सामने आई बात
महादेवसाल हॉल्ट का मामला 22 सितंबर को उस समय चर्चा में आया, जब चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हरिया स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंचे।निरीक्षण के दौरान उन्हें पता चला कि स्टेशन पर टिकट काउंटर होने के बावजूद नियमित टिकट बिक्री की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद स्टेशन पर बुकिंग कर्मचारी की तैनाती और टिकट बिक्री से जुड़ी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, महादेवसाल को मुख्य रूप से परिचालन संबंधी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे नियमित व्यावसायिक टिकट बिक्री वाले स्टेशन के रूप में विकसित नहीं किया गया है।
रेलवे ने बताई टिकट काउंटर न होने की वजह
चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य कुमार चौधरी के अनुसार, महादेवसाल एक ऑपरेटिंग स्टेशन है, जहां परिचालन से जुड़े काम होते हैं। यह व्यावसायिक ठहराव वाला स्टेशन नहीं है।
उन्होंने बताया कि स्टेशन को टाइप-सी श्रेणी में रखा गया है। इसी वजह से यहां स्थायी बुकिंग क्लर्क की नियुक्ति नहीं की गई है।हालांकि, सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों और भक्तों की सुविधा के लिए रेलवे की ओर से अस्थायी टिकट काउंटर खोले जाते हैं।
सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
महादेवसाल हॉल्ट के पास एक प्राचीन शिव मंदिर स्थित है, जिसे महादेवशाल धाम के नाम से जाना जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।श्रावणी मेले के समय यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे अस्थायी बुकिंग काउंटर की व्यवस्था करता है। बाकी दिनों में नियमित टिकट बिक्री की सुविधा उपलब्ध नहीं रहती।यही वजह है कि सामान्य दिनों में स्टेशन पर ट्रेनें रुकने के बावजूद यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा लेना पड़ता है।
150 साल पुराने शिव मंदिर से जुड़ा है स्टेशन का नाम
महादेवसाल स्टेशन की पहचान सिर्फ रेलवे व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसका नाम यहां स्थित करीब 150 साल पुराने महादेवशाल धाम से जुड़ा हुआ है।स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में मौजूद शिवलिंग का आधा हिस्सा ही पूजा का केंद्र है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूजा करते हैं। मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित हैं।वर्ष 2016 में रेलवे ने करीब चार करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन का निर्माण कराया था। इसकी इमारत को मंदिर जैसी आकृति दी गई है। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा से जुड़ी कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन नियमित टिकट बिक्री की सुविधा अब भी नहीं है।
खुदाई के दौरान मिला था शिवलिंग
स्थानीय लोगों के अनुसार, महादेवशाल मंदिर की कहानी 19वीं सदी के मध्य की बताई जाती है। उस समय बंगाल-नागपुर रेलवे की ओर से कलकत्ता से मुंबई के बीच रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा था।इसी दौरान पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा क्षेत्र के बड़ैला गांव के आसपास खुदाई करते समय मजदूरों को जमीन के भीतर एक शिवलिंग दिखाई दिया। मान्यता है कि शिवलिंग मिलने के बाद मजदूरों ने खुदाई रोक दी और आगे काम करने से इनकार कर दिया।स्थानीय कथाओं के मुताबिक, वहां मौजूद ब्रिटिश इंजीनियरों ने मजदूरों की बात को नजरअंदाज किया और शिवलिंग को हटाने की कोशिश की। इसी दौरान फावड़े से प्रहार होने के कारण शिवलिंग का एक हिस्सा टूट गया।
इंजीनियर की मौत और रेल लाइन बदलने की मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर प्रहार करने वाले ब्रिटिश इंजीनियर की उसी दिन काम से लौटते समय रास्ते में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद लोगों की आस्था इस स्थान से जुड़ गई और वहां पूजा-पाठ शुरू हो गया।यह भी कहा जाता है कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए रेलवे लाइन की दिशा में बदलाव किया गया, ताकि शिवलिंग वाले स्थान को बचाया जा सके। हालांकि, ये बातें स्थानीय मान्यताओं और कथाओं पर आधारित हैं।आज महादेवसाल हॉल्ट अपनी अनोखी पहचान के कारण चर्चा में है। यहां ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन नियमित टिकट बिक्री नहीं होती। सावन जैसे विशेष अवसरों पर ही अस्थायी काउंटर खोले जाते हैं।







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