Entertainment: बॉलीवुड के कई मशहूर गानों की जड़ें भारतीय लोकसंगीत में छिपी हैं। ऐसा ही एक लोकप्रिय गाना है ‘ससुराल गेंदा फूल’, जिसे 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल्ली-6’ के जरिए देशभर में पहचान मिली। रेखा भारद्वाज की आवाज, एआर रहमान के संगीत और देसी अंदाज वाले बोलों ने इस गाने को खास बना दिया। फिल्म रिलीज होने के करीब 17 साल बाद भी यह गाना शादी-ब्याह और पारिवारिक समारोहों में खूब सुनाई देता है।
खास बात यह है कि इस गाने की धुन को छत्तीसगढ़ की पुरानी लोकपरंपरा से जोड़ा जाता है। इसकी मूल लोकधुन को छत्तीसगढ़ी कवि गंगाराम शिवारे और संगीतकार भुलवाराम यादव से जोड़कर देखा जाता है। लोकगीत में नई दुल्हन के ससुराल पहुंचने के बाद उसके रिश्तों और रोजमर्रा के अनुभवों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया जाता था। सास, ननद, देवर और पति के साथ होने वाली नोकझोंक इसके कथ्य का हिस्सा रही है।
लोकगीत से फिल्मी गाने तक कैसे पहुंची धुन?
इस लोकधुन को आगे बढ़ाने में लोक कलाकार और अभिनेता रघुवीर यादव की भूमिका बताई जाती है। ‘दिल्ली-6’ की टीम तक धुन पहुंचने के बाद एआर रहमान ने इसे आधुनिक फिल्मी संगीत के साथ नया रूप दिया। प्रसून जोशी ने भी फिल्म की जरूरत के मुताबिक इसके बोलों में बदलाव किए। इस तरह पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत और आधुनिक बॉलीवुड धुन का मेल तैयार हुआ।
ददरिया परंपरा से जुड़ाव
‘ससुराल गेंदा फूल’ को छत्तीसगढ़ की ददरिया शैली से भी जोड़ा जाता है। ददरिया लोकगीतों में आमतौर पर संवाद, रिश्तों और ग्रामीण जीवन की सहज झलक दिखाई देती है। यही देसीपन बाद में फिल्मी संस्करण की पहचान बना और गाने ने शहरी दर्शकों के बीच भी अपनी अलग जगह बनाई।
‘दिल्ली-6’ से मिली देशभर में पहचान
राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘दिल्ली-6’ में अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में वहीदा रहमान, ऋषि कपूर, ओम पुरी, सुप्रिया पाठक, विजय राज और दिव्या दत्ता समेत कई कलाकार नजर आए। फिल्म की कहानी से ज्यादा उसके संगीत को दर्शकों ने लंबे समय तक याद रखा और ‘ससुराल गेंदा फूल’ इसका प्रमुख उदाहरण बना।
आज भी शादियों में क्यों बजता है गाना?
इस गाने की सबसे बड़ी खासियत इसका देसी और उत्सवी अंदाज है। रिश्तों की नोकझोंक, आसान बोल और लोकधुन का प्रभाव इसे सामूहिक समारोहों के लिए सहज बनाता है। यही वजह है कि 17 साल बाद भी ‘ससुराल गेंदा फूल’ सिर्फ एक पुराना फिल्मी गाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से बॉलीवुड तक पहुंची उस धुन की पहचान बना हुआ है।






