Sukma News: जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई को लेकर कांग्रेस का बड़ा अभियान, हरीश कवासी बोले-निर्दोष आदिवासियों के न्याय के लिए सड़क से सदन तक लड़ेंगे

Sanjay Sahu
Sukma News

Sukma News: कृष्णा नायक/सुकमा :- जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी ने बड़ा अभियान शुरू किया है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने कोंटा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मिलमपल्ली के आश्रित ग्राम तिम्मापुरम से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर जेलों में बंद आदिवासियों और उनके परिजनों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की।

हस्ताक्षर अभियान के दौरान जेलों में बंद आदिवासियों के परिवारों का दर्द भी सामने आया। कई परिवारों ने बताया कि उनके पति, बेटे और अन्य परिजन लंबे समय से जेलों में बंद हैं। अपनों की रिहाई की आस लगाए बैठे परिवारों की पीड़ा कार्यक्रम के दौरान साफ दिखाई दी। कई पीड़ित महिलाओं की आंखों में अपने परिजनों को जल्द घर लौटते देखने की उम्मीद के साथ आंसू छलक पड़े।

इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष बेको हूंगा ने कहा कि नक्सल मामलों के नाम पर बड़ी संख्या में आदिवासियों के जेल में बंद होने की बात सामने आती रही है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए और यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है तो उसे जल्द से जल्द न्याय और रिहाई मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जेल में बंद लोगों के कारण उनके परिवार आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।

बस्तर नक्सल मुक्त हो गया तो निर्दोष आदिवासी जेल में क्यों

हस्ताक्षर अभियान को संबोधित करते हुए हरीश कवासी लखमा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है तो निर्दोष आदिवासियों को जेलों में बंद रखने का औचित्य क्या है उन्होंने कहा कि जिन आदिवासियों के खिलाफ गंभीर आरोप साबित नहीं हुए हैं उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें जल्द न्याय दिया जाना चाहिए।

हरीश कवासी लखमा ने कहा यह केवल हस्ताक्षर अभियान नहीं है, बल्कि उन आदिवासी परिवारों की आवाज है जिनका कोई अपना आज भी जेल में बंद है। हम उनकी आवाज को दबने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए हम गांव-गांव जाकर लोगों का समर्थन जुटाएगे और इस मुद्दे को सरकार के सामने मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार वर्षों से अपने पति, बेटे और परिवार के सदस्यों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे परिवारों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने आगे कहा कि जो निर्दोष आदिवासी आज जेल में बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए, ताकि वे अपने बीवी-बच्चों, माता-पिता और परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें। किसी परिवार से उसका सहारा वर्षों तक दूर रहना केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की पीड़ा है।

हस्ताक्षर अभियान से ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद

तिम्मापुरम से शुरू हुए इस हस्ताक्षर अभियान को ग्रामीणों ने आदिवासी समाज के न्याय और अधिकार की लड़ाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। ग्रामीणों का कहना है कि हरीश कवासी लखमा के इस अभियान से जेल में बंद अपने परिजनों की रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों में नई उम्मीद जगी है।

Sukma News: हरीश कवासी लखमा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल तिम्मापुरम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांव-गांव जाकर हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे। हस्ताक्षरों के माध्यम से आदिवासी समाज की सामूहिक मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के मुद्दे को सड़क से सदन तक मजबूती से उठाने की बात कही गई है।

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