Tuesday, September 8, 2026
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Raipur private schools: प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के नियमों में बड़ा बदलाव, एक बिल्डिंग में दो बोर्ड नहीं चलेंगे; क्लासरूम में 45 से ज्यादा बच्चे नहीं

Raipur private schools
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Raipur private schools: रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने और उनकी मान्यता से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है, जिसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाएगा। इससे पहले 2018 के नियम प्रभावी थे।

नई व्यवस्था में स्कूल खोलने के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। हालांकि, स्कूल संचालकों को सेल्फ सर्टिफिकेशन देना होगा। इसमें उन्हें स्कूल भवन की सुरक्षा, लैब, लाइब्रेरी, खेल मैदान, योग्य शिक्षकों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जानकारी देनी होगी।

गलत जानकारी देने पर मान्यता रद्द

सेल्फ सर्टिफिकेशन में गलत जानकारी पाए जाने पर स्कूल की मान्यता निलंबित या रद्द की जा सकती है। इसके अलावा स्कूल पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कॉर्पस फंड की अनिवार्यता खत्म

नई गाइडलाइन में स्कूलों के लिए न्यूनतम कॉर्पस फंड रखने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। स्कूल संचालक को केवल यह प्रमाणित करना होगा कि उसके पास स्कूल संचालन और कर्मचारियों के वेतन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं। हर शैक्षणिक सत्र खत्म होने के तीन महीने के भीतर स्कूल को ऑडिट रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन

नई मान्यता का पूरा आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। स्कूल के अधिकृत अधिकारी को मंडल के पोर्टल पर आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क भी ऑनलाइन जमा करना होगा।

हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता एक साथ नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल की मान्यता लेना जरूरी होगा। इसके बाद ही हायर सेकंडरी की मान्यता के लिए आवेदन किया जा सकेगा।

बिना मान्यता 9वीं से 12वीं तक कक्षाएं नहीं

मंडल की मान्यता के बिना कोई प्राइवेट स्कूल 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेगा। अगर किसी स्कूल की मान्यता रद्द होती है तो वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नजदीकी सरकारी स्कूल में स्थानांतरित किया जाएगा।

हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग व्यवस्था

अगर कोई स्कूल हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम संचालित करता है तो दोनों के लिए अलग जमीन, भवन, प्रिंसिपल और शिक्षण स्टाफ की व्यवस्था करनी होगी।

एक ही बिल्डिंग में दो अलग-अलग बोर्ड संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। कोई स्कूल अंग्रेजी माध्यम शुरू करना चाहता है तो उसे नए स्कूल के रूप में मान्यता लेनी होगी। अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अंग्रेजी माध्यम की शैक्षणिक पृष्ठभूमि का प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा।

स्कूल की जमीन और भवन के लिए नए मानक

स्कूल की जमीन संचालक के नाम होनी चाहिए। इसके अलावा कम से कम तीन साल का किराया अनुबंध या रजिस्टर्ड लीज भी मान्य होगी। जमीन का बी-1 खसरा और सिविल इंजीनियर से तैयार भवन का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत से प्रमाणित होना जरूरी होगा।

नक्शे में जमीन, पूरी बिल्डिंग और प्रत्येक कमरे का क्षेत्रफल अलग-अलग दर्शाना होगा। अगर शुरुआत में संचालक के पास खुद की जमीन नहीं है तो जमीन खरीदने और भवन निर्माण का वर्क प्लान देना होगा। इसे तीन साल के भीतर पूरा करना होगा। निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने पर चौथे साल से हर साल पेनल्टी लगेगी। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। स्कूल परिसर में खेल, प्रार्थना और पार्किंग के लिए खुली जगह भी रखनी होगी।

क्लासरूम में अधिकतम 45 बच्चे

नई गाइडलाइन के तहत प्रत्येक क्लासरूम कम से कम 300 वर्गफीट का होना चाहिए। एक कमरे में अधिकतम 45 विद्यार्थी ही बैठ सकेंगे। प्रत्येक बच्चे के लिए कम से कम 6 वर्गफीट जगह निर्धारित की गई है।

हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम जरूरी होंगे। हायर सेकंडरी में चुने गए संकाय के अनुसार अतिरिक्त कमरों की व्यवस्था करनी होगी। एक बिल्डिंग में एक ही शिफ्ट संचालित होगी और स्कूल की शिफ्ट कम से कम 6 घंटे की होगी। अधूरी बिल्डिंग, जंगल की जमीन, सरकारी जमीन या अतिक्रमण वाली जमीन पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। निरीक्षण के दौरान स्कूल भवन की वीडियोग्राफी भी प्रस्तुत करनी होगी।

व्यावसायिक दुकानों के बीच, फ्लैट्स के बीच या नियमों के विपरीत स्थान पर स्कूल संचालित नहीं किया जा सकेगा। स्कूल परिसर के भीतर किसी अन्य व्यवसाय की अनुमति भी नहीं होगी।

लाइब्रेरी और लैब साझा कर सकेंगे स्कूल

नई गाइडलाइन में स्कूलों को कुछ सुविधाएं साझा करने की अनुमति दी गई है। लाइब्रेरी, लैब, खेल मैदान और कंप्यूटर लैब स्कूल परिसर में होना बेहतर माना गया है, लेकिन इन्हें नजदीकी सरकारी संस्थान, नगर पालिका, कॉलेज या दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ साझा किया जा सकता है।

इसके लिए औपचारिक समझौता जरूरी होगा। विद्यार्थियों की आवाजाही का रिकॉर्ड रखना होगा और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी।हाईस्कूल में एक लैब पर्याप्त होगी, जबकि हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब की व्यवस्था करनी होगी। कंप्यूटर शिक्षा के लिए PGDCA योग्य शिक्षक रखना जरूरी होगा।

हाईस्कूल में 13 पदों का स्टाफ सेटअप

हाईस्कूल के लिए कुल 13 पदों का स्टाफ सेटअप निर्धारित किया गया है। इसमें एक प्रिंसिपल, 6 लेक्चरर और अन्य सपोर्ट स्टाफ शामिल होंगे। हायर सेकंडरी में प्रत्येक संकाय के अनुसार करीब 10 पदों का स्टाफ रखना होगा। प्रिंसिपल और लेक्चरर के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ B.Ed जरूरी होगा। प्रिंसिपल के पास कम से कम 5 साल का शिक्षण अनुभव होना चाहिए।

स्कूल में काउंसलर की व्यवस्था भी करनी होगी और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना होगा। स्टाफ की सूची के साथ फोटो, आधार, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और वेतन पर्ची भी जमा करनी होगी।

बच्चों की सुरक्षा के लिए कई इंतजाम जरूरी

स्कूल में साफ पेयजल, छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए टॉयलेट और स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था जरूरी होगी।

इसके अलावा बिजली, पर्याप्त फर्नीचर और CCTV कैमरे भी अनिवार्य होंगे। स्कूल बस संचालित करने वाले संस्थानों को हर साल बस का तकनीकी निरीक्षण कराना होगा। ड्राइवर और कंडक्टर का स्वास्थ्य परीक्षण भी जरूरी होगा।

स्कूल के नाम में नहीं लगा सकेंगे कुछ शब्द

नई गाइडलाइन में स्कूलों के नाम को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। निजी स्कूल अपने नाम में National, International, Navodaya, Eklavya, Prayas, Kendriya, Rashtriya, PM Shri, Swami Atmanand और Swami Vivekanand Utkrisht जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

मंडल के अनुसार, ऐसे नामों से अभिभावकों में स्कूल की प्रकृति या सरकारी संस्थान से जुड़ी गलतफहमी पैदा हो सकती है।

मान्यता मिलने के बाद स्कूल को कम से कम एक बोर्ड परीक्षा तक संचालित करना होगा। लगातार दो साल तक नवीनीकरण शुल्क और परीक्षा फॉर्म जमा नहीं करने पर स्कूल की मान्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी।

दूसरे बोर्ड में जाने के लिए NOC जरूरी

अगर कोई स्कूल CBSE या किसी अन्य बोर्ड से मान्यता लेना चाहता है तो उसे मंडल में तीन साल की फीस एक साथ जमा करनी होगी। इसके बाद ही NOC जारी की जाएगी।

स्कूल की जगह, भवन, नाम या माध्यम में बदलाव करने के लिए पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद 30 दिन के भीतर मंडल में आवेदन करना होगा। बिना अनुमति बदलाव करने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है। स्कूल का मैनेजमेंट भी मंडल की अनुमति के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

ये हैं स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक

Raipur private schools: मंडल ने नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया है कि ये स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक हैं। जो स्कूल इन नियमों को पूरा नहीं करेंगे, अगले वर्ष उनकी मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा। यानी नई व्यवस्था में स्कूल खोलने वालों को एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट और कॉर्पस फंड से राहत दी गई है, लेकिन भवन, स्टाफ, सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कूल संचालन से जुड़े नियमों को पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और सख्त किया गया है।

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