बिलासपुर। Nishaanebaz.com-Bilaspur High Court Promotion Order: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद पर पदोन्नत अधिकारियों की सेवा अवधि की गणना को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के लिए आवश्यक अर्हकारी सेवा (Qualifying Service) की गणना वास्तविक ज्वाइनिंग तिथि से न होकर उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने फीडर कैडर में नियुक्ति ली है।
यह ऐतिहासिक निर्णय ओम प्रकाश देवांगन, धर्मेश कुमार साहू, अपराजिता सिंह राणा और गौरव शुक्ला की ओर से दायर रिट अपील पर आया है। सभी अपीलकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2017 में सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद पर हुई थी और उन्होंने नवंबर 2017 में अपनी सेवा शुरू की थी। छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2021 के तहत सब इंस्पेक्टर (रेडियो) से इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नत होने के लिए 8 वर्ष की अर्हकारी सेवा अनिवार्य है।
अपीलकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता सौरभ साहू ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) के अनुसार अर्हकारी सेवा की गणना कर्मचारी के फीडर कैडर में शामिल होने वाले कैलेंडर वर्ष से होनी चाहिए। इस नियमानुसार वर्ष 2017 को पहला वर्ष मानते हुए उनकी 8 वर्ष की सेवा वर्ष 2024 में पूर्ण हो चुकी है और वे 1 जनवरी 2025 से इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए पूरी तरह पात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग में इंस्पेक्टर (रेडियो) के 7 पद रिक्त हैं।
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इससे पूर्व एकल पीठ ने 10 अक्टूबर 2025 के अपने आदेश में याचिका खारिज करते हुए माना था कि वास्तविक ज्वाइनिंग तिथि (नवंबर 2017) के आधार पर उनकी 8 वर्ष की सेवा अक्टूबर 2025 में पूरी होगी और वे 1 जनवरी 2026 से पात्र होंगे। इस आदेश को चुनौती देते हुए अधिकारियों ने डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया, जहां राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता एस.एस. बघेल ने पैरवी की।
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मामले की विस्तृत सुनवाई के पश्चात चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के 10 अक्टूबर 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब सेवा नियमों में स्पष्ट रूप से ‘कैलेंडर वर्ष’ का उल्लेख है, तो वास्तविक ज्वाइनिंग तिथि के आधार पर पदोन्नति रोकना पूर्णतः अनुचित है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि चारों अधिकारियों को 1 जनवरी 2025 की स्थिति में 8 वर्ष की सेवा पूर्ण मानते हुए उनके मामलों को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के समक्ष रखें तथा नियमानुसार सभी परिणामी लाभ प्रदान करें।






