MP News: दमोह में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल! अस्पताल बंद, तड़पती रही गर्भवती…साड़ियों की आड़ में हुआ प्रसव

Rahul Goshwami

MP Health System: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर दमोह जिले से सामने आई है। बटियागढ़ ब्लॉक के आदिवासी इलाके में प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर अस्पताल के गेट पर ताला लगा मिला।परिजनों के मुताबिक महिला करीब चार घंटे तक स्वास्थ्यकर्मियों के आने का इंतजार करती रही। इस दौरान न तो स्वास्थ्य केंद्र का ताला खुला और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंचा। महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद आखिरकार अस्पताल के बाहर ही प्रसव कराना पड़ा।

जानकारी के अनुसार फूडताल सादपुर गांव निवासी मादेश भील अपनी पत्नी मन्जो भील को प्रसव पीड़ा होने पर अजब धाम फतेहपुर उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे।अस्पताल बंद मिलने के बाद परिजनों ने महिला को केंद्र के बाहर बने चबूतरे पर लिटाया। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही कोई स्वास्थ्यकर्मी आएगा और महिला को इलाज मिल सकेगा। लेकिन करीब चार घंटे बीतने के बाद भी स्थिति नहीं बदली।महिला की हालत और प्रसव पीड़ा बढ़ने लगी तो स्थानीय महिलाओं ने आगे आकर मदद की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिलाओं ने साड़ियों की आड़ बनाकर महिला का प्रसव कराया।

अस्पताल के बाहर बच्चे का जन्म
जिस स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है, उसी केंद्र के बाहर प्रसव होने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रसव के बाद स्थानीय लोगों ने निजी वाहन की व्यवस्था की और जच्चा-बच्चा दोनों को बटियागढ़ के सरकारी अस्पताल भेजा गया। वहां दोनों को आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रसव एक ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी होता है।
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स्वास्थ्य केंद्र के संचालन पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर है। यदि स्वास्थ्य केंद्र में नियमित ड्यूटी की व्यवस्था है, तो रात के समय गेट पर ताला क्यों लगा था? अगर किसी स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी थी, तो प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को करीब चार घंटे तक इंतजार क्यों करना पड़ा?स्थानीय लोगों ने केंद्र की नियमित व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर कई बार ताला लगा रहने की स्थिति सामने आती है।स्थानीय लोगों के मुताबिक इस भवन का लोकार्पण मंत्री लखन पटेल द्वारा किया गया था। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि भवन बनने के बाद यहां स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से चल रही हैं या नहीं। हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

रात में गंभीर मरीज आए तो जिम्मेदारी किसकी?
इस घटना ने केवल एक महिला के प्रसव का मुद्दा नहीं उठाया है, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े किए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात के समय किसी मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाए और स्वास्थ्य केंद्र बंद मिले, तो ऐसे में मरीज को तत्काल इलाज कैसे मिलेगा? आपात स्थिति में स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है।

खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मांगा जवाब
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विस्तार न्यूज की खबर पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लगे होने के आरोपों पर एएनएम लक्ष्मी अहिरवार से जवाब मांगा है।एएनएम को तीन दिनों के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग की ओर से मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह जवाब और जांच के बाद स्पष्ट होगा।

आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल
दमोह के बटियागढ़ से सामने आया यह मामला ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इसलिए बनाए जाते हैं ताकि लोगों को समय पर और नजदीक चिकित्सा सुविधा मिल सके।लेकिन यदि प्रसव जैसी आपात स्थिति में भी मरीज को अस्पताल के बाहर इंतजार करना पड़े और अंत में वहीं प्रसव कराना पड़े, तो व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करना जरूरी हो जाता है।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच और मांगे गए जवाब से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला क्यों लगा था, ड्यूटी पर कौन था और गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी। यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल बना हुआ है।

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