Saturday, September 5, 2026
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Bilaspur High Court Supari Killing Case Order: 10 महीने से फरार आरोपी कांग्रेस नेता को हाई कोर्ट से झटका; जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच ने खारिज की याचिका

Chhattisgarh High Court
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बिलासपुर। Nishaanebaz.com-Bilaspur Masturi Shootout Nagendra Rai Bail Dismissed: बिलासपुर जिले के चर्चित मस्तूरी गोलीकांड और सुपारी किलिंग मामले में आरोपी कांग्रेस नेता नागेंद्र राय को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने नागेंद्र राय की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। अदालत ने आरोपों की अत्यंत गंभीर प्रकृति, आरोपी के पिछले 10 महीनों से फरार होने और उसके लंबे आपराधिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, मस्तूरी में 28 अक्टूबर 2025 की शाम लगभग 6 बजे तामेश सिंह के दफ्तर के बाहर अज्ञात बदमाशों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस जानलेवा हमले में धनेंद्र सिंह (राजू सिंह) और चंद्रकांत सिंह को गोलियां लगी थीं और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि नितेश सिंह, चंद्रकांत सिंह, राजू सिंह और तामेश सिंह की हत्या करने के उद्देश्य से 2 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी आपराधिक साजिश में नागेंद्र राय की मुख्य भूमिका थी और उसी ने सह-आरोपियों को वारदात के लिए हथियार उपलब्ध कराए थे।

घटना व स्थल (Location) मस्तूरी, जिला बिलासपुर (28 अक्टूबर 2025 की घटना)
आरोपी (Accused) नागेंद्र राय (सह-आरोपी, हत्या की साजिश व हथियार सप्लाई का आरोप)
न्यायालय का फैसला (Court Order) हाई कोर्ट जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने अग्रिम जमानत खारिज की
मुख्य आधार (Main Grounds) 10 माह से फरारी, हत्या की सुपारी/हथियार आपूर्ति का आरोप, आपराधिक रिकॉर्ड
राज्य शासन का पक्ष (State’s Stand) आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा, उस पर 8 अन्य मामले दर्ज हैं

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सुनवाई के दौरान नागेंद्र राय के वकील ने दलील दी कि उसे राजनीतिक रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि हथियार देने या सह-आरोपी के साथ डील का कोई सीधा सबूत नहीं है और पुराने 8 मामलों में से 4 में वह बरी हो चुका है।

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वहीं राज्य शासन की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने बताया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से नागेंद्र राय के अन्य आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में रहने की पुष्टि हुई है। हाई कोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर वारदात के लिए हथियार सप्लाई करने जैसा गंभीर आरोप है और वह 10 महीने से फरार रहकर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

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