नेपाल में बाढ़ का कहर! 1,280 से ज्यादा मौतें, हजारों लोग गायब, सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी

Rahul Goshwami

Nepal Flash Floods: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े इलाके में भारी तबाही मचा दी है। Nepal Flash Floods के बाद कई गांव, सड़कें और पुल पानी और मलबे की चपेट में आ गए हैं। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हादसे के करीब एक सप्ताह बाद भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में बाढ़ और उससे हुई तबाही के कारण कम से कम 1,259 लोगों की मौत हुई है। वहीं 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी तरफ तिब्बत में 21 लोगों की जान जाने की जानकारी है और 541 लोग लापता हैं।इस तरह दोनों क्षेत्रों को मिलाकर मृतकों की संख्या करीब 1,280 और लापता लोगों की संख्या 5,600 से ज्यादा बताई जा रही है। Nepal Flash Floods की इस त्रासदी ने बड़ी संख्या में परिवारों को अपने लोगों की तलाश के लिए मजबूर कर दिया है।

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती
अब राहत और बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिनके हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक करीब 900 लोग छह अलग-अलग परियोजनाओं में फंसे हो सकते हैं।भारी मात्रा में जमा मलबे ने रेस्क्यू ऑपरेशन को काफी मुश्किल बना दिया है। कई जगहों पर रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं। ऐसे में इंजीनियर सुरंगों के नक्शों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी की मदद से बचाव टीमों को अंदर जाने का रास्ता खोजने में मदद कर रहे हैं।
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बाढ़ के मलबे ने बढ़ाई रेस्क्यू टीमों की मुश्किल
Nepal Flash Floods के बाद कई इलाकों में मलबे की मोटी परत जमा हो गई है। इससे राहत टीमों के लिए प्रभावित जगहों तक पहुंचना और सुरंगों के भीतर फंसे लोगों का पता लगाना कठिन हो रहा है।रेस्क्यू टीमों के सामने समय भी एक बड़ी चुनौती है। लापता लोगों के परिवार लगातार उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। इसी वजह से बचाव अभियान में उपलब्ध तकनीक और विशेषज्ञ टीमों की मदद ली जा रही है।

हजारों परिवारों के सामने घर फिर से बसाने की चुनौती
बाढ़ से केवल जान-माल का नुकसान ही नहीं हुआ, बल्कि बड़ी संख्या में घर भी पूरी तरह तबाह हो गए हैं। अधिकारियों के शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 7,500 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।इसके अलावा कई ऐसे मकान भी हैं जो बाहर से खड़े दिखाई दे रहे हैं, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित नहीं बचे हैं। ऐसे में करीब 20 हजार घरों को सुरक्षित जगहों पर दोबारा बनाने की जरूरत पड़ सकती है।इससे साफ है कि Nepal Flash Floods के बाद नेपाल के सामने सिर्फ राहत और बचाव की चुनौती नहीं है। प्रभावित लोगों को लंबे समय तक सुरक्षित घर, बुनियादी सुविधाएं और सामान्य जीवन लौटाने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण करना होगा।

भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
इस मुश्किल समय में भारत ने नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सहयोग दिया है। भारत की ओर से मानवीय सहायता भेजने के साथ मेडिकल और विशेष सुरंग-बचाव टीमों को भी तैनात किया गया है।विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल से 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इस बीच नेपाल और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।Nepal Flash Floods की यह त्रासदी राहत-बचाव के साथ अब बड़े पुनर्निर्माण अभियान की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर उन रेस्क्यू ऑपरेशन पर है, जिनके जरिए सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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