Wednesday, September 2, 2026
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Dr Sarvepalli Radhakrishnan Education Philosophy Career: दार्शनिक से लेकर उपराष्ट्रपति और देश के राष्ट्रपति तक, जानें कितने पढ़े-लिखे थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Dr Sarvepalli Radhakrishnan Educational Qualification: भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस महान दार्शनिक, शिक्षाविद और राजनेता डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उनका जीवन इस बात का एक बेमिसाल उदाहरण है कि उच्च शिक्षा, विचार और ज्ञान किसी व्यक्ति को समाज में सर्वोच्च स्थान दिलाने के साथ-साथ देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक भी पहुंचा सकते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वर्ष 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा दर्शनशास्त्र (Philosophy) के क्षेत्र में पूरी की थी। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद वे दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने और उन्होंने भारतीय दर्शन तथा धर्म को पश्चिमी अकादमिक दुनिया के सामने अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

डॉ. राधाकृष्णन: जबरदस्ती में की थी दर्शन-शास्त्र की पढ़ाई, इसी विषय में थी बेचैनी की पहचानआधिकारिक अभिलेखों के अनुसार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की उच्च शैक्षणिक योग्यताओं में एम.ए., डी.लिट., एलएलडी, डीसीएल और लिटरेचर डॉक्टरेट जैसी प्रतिष्ठित उपाधियां शामिल हैं। उन्हें ऑक्सफोर्ड के ऑल सोल्स कॉलेज का मानद फेलो भी चुना गया था। उनके अकादमिक जीवन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्यापन का कार्य किया। इसके अलावा, उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘पूर्वी धर्म और नैतिकता’ से संबंधित प्रतिष्ठित स्पाल्डिंग प्रोफेसरशिप भी प्रदान की गई थी।

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डॉ. राधाकृष्णन का योगदान केवल अध्यापन और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहा। वे आंध्र विश्वविद्यालय तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति (Vice-Chancellor) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्य करते हुए देश की शिक्षा नीति को नई दिशा दी। उनके अनुसार शिक्षा समाज को सकारात्मक रूप से बदलने का सबसे सशक्त साधन है। उन्होंने भारतीय दर्शन पर कई प्रसिद्ध पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें Indian Philosophy, The Hindu View of Life, An Idealist View of Life, Eastern Religions and Western Thought और The Principal Upanishads जैसी कालजयी रचनाएं शामिल हैं।

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एक शिक्षाविद से देश के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने का उनका राजनीतिक सफर भी बेहद प्रेरणादायक रहा। वर्ष 1952 में देश के पहले उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने लगातार दो कार्यकालों (10 वर्षों) तक इस जिम्मेदारी को संभाला। वर्ष 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया गया। इसके बाद वर्ष 1962 में आयोजित राष्ट्रपति चुनाव में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन विजयी घोषित हुए और 13 मई 1962 को उन्होंने भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, जिस पद पर वे 12 मई 1967 तक निष्ठापूर्वक रहे।

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