Raipur Dharsiwa CHC Negligence News: राजधानी से सटे धरसीवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली, गंभीर बीमार 7 साल की बच्ची को इलाज के लिए घंटों कराया इंतजार

VIKASH KHALKHO

मोहम्मद याकुब/धरसींवा। Nishaanebaz.com-Raipur Dharsiwa CHC Negligence: राजधानी रायपुर से महज कुछ ही दूरी पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धरसींवा इन दिनों अपनी बदहाली, अव्यवस्थाओं और चिकित्सकों के अड़ियल रवैये को लेकर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। इस स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर चिकित्सा नियमों और दायित्वों को दरकिनार कर एमएलसी (मेडिको लीगल केस) के लिए लाए गए आरोपियों से केवल यह पूछकर कि ‘आपने शराब का सेवन किया है या नहीं’, अपनी रिपोर्ट बनाने के लिए विवश नजर आ रहे हैं। इस पूरी व्यवस्थागत खामी पर जब मीडिया प्रतिनिधि ने ड्यूटी डॉक्टर से सवाल-जवाब करना चाहा, तो संबंधित महिला डॉक्टर कैमरे से बचती हुई दिखाई दीं।

अस्पताल की इस गंभीर लापरवाही के बीच एक हैरान कर देने वाला मामला तब सामने आया, जब तेज बुखार से गंभीर रूप से पीड़ित महज 7 वर्ष की मासूम बालिका को डॉक्टर ने सिर्फ एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने का हवाला देकर घंटों तक इलाज के लिए लाइन में खड़ा रखा। बच्ची की बिगड़ती हालत को देख परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने आक्रोशित होकर अस्पताल की पर्ची फाड़कर संबंधित डॉक्टर की टेबल पर फेंक कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। परिजनों के इस विरोध के बाद डॉक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।

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विवाद बढ़ने पर ड्यूटी डॉक्टर ने धरसींवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. विकास तिवारी से फोन पर बात कराई। हालांकि, प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाले बीएमओ ने भी पीड़ित बच्ची के तत्काल इलाज की व्यवस्था करने के बजाय संबंधित डॉक्टर की कार्यप्रणाली को सही ठहराते हुए उनकी तरफदारी की। लेकिन जैसे ही बीएमओ और डॉक्टर को यह भनक लगी कि पीड़ित बच्ची एक स्थानीय पत्रकार की बेटी है, तो अस्पताल प्रशासन के तेवर तुरंत बदल गए और आनन-फानन में नई पर्ची बनाकर बच्ची का उपचार शुरू किया गया।

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इस पूरे घटनाक्रम ने शासकीय अस्पतालों में आम नागरिकों के साथ होने वाले भेदभाव और प्रशासनिक संवेदनहीनता को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब क्षेत्र में यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि किसी भी अस्पताल में पहले किसी बीमार बच्चे का आपातकालीन इलाज जरूरी है या फिर एमएलसी की प्रक्रिया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि धरसींवा अस्पताल में अधिकारियों और डॉक्टरों के तानाशाही रवैये को स्वयं बीएमओ द्वारा शह दी जा रही है, जिससे आम ग्रामीण मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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