बलौदाबाजार। Nishaanebaz.com-Balodabazar Job Fraud Case: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी के खिलाफ ठगी का एक और नया मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी आयुर्वेदिक केंद्र के कर्मचारी से तबादला कराने और फिर मंत्रालय में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए आरोपी ने अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले जाली नियुक्ति पत्र भी थमा दिए। मामले में शिकायत मिलने के बाद बलौदाबाजार पुलिस जांच में जुट गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम जारा स्थित सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र के कर्मचारी मेघनाथ बंजारे ने बलौदाबाजार एसपी कार्यालय पहुंचकर पूर्व भाजपा नेता के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने बताया कि वह अपने गांव के पास तबादला कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कृष्णा अवस्थी से संपर्क किया, जिसने ट्रांसफर के नाम पर 30 हजार रुपये लिए। हालांकि, 14 महीने बीत जाने के बाद भी जब तबादला नहीं हुआ और मेघनाथ ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने उन्हें झांसे में ले लिया।
आरोपी कृष्णा अवस्थी ने पीड़ित के बेटे और उसके दोस्तों को मंत्रालय में पक्की सरकारी नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया। नौकरी के नाम पर अलग-अलग किस्तों में करीब 10 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। जब महीनों बीत जाने पर भी नौकरी नहीं मिली, तो आरोपी ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंप दिए। पीड़ित मेघनाथ बंजारे ने एसपी कार्यालय में 3 नियुक्ति पत्र प्रस्तुत किए हैं, जो पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। आरोप है कि इन पत्रों पर संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और फर्जी सील का इस्तेमाल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी के खिलाफ ठगी की यह तीसरी औपचारिक शिकायत दर्ज हुई है। इससे पहले भी उन पर फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर के जरिए लोगों से लाखों रुपये ठगने का मामला दर्ज हो चुका है, जिसके सिलसिले में वे वर्तमान में जेल में बंद हैं। लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से पहले ही निष्कासित कर दिया है।
बलौदाबाजार पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र और जाली नियुक्ति पत्रों की तकनीकी जांच की जा रही है। जांच की प्रक्रिया पूरी होते ही जेल में बंद आरोपी के खिलाफ वैधानिक धाराओं के तहत नई प्राथमिक रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





