Bilaspur High Court Order: प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन पर हाईकोर्ट की सख्ती, कलेक्टर राजनांदगांव का अपीलीय आदेश निरस्त

VIKASH KHALKHO

बिलासपुर। Nishaanebaz.com-Bilaspur High Court Order: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर हाईकोर्ट) ने विभागीय जांच में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन नहीं किए जाने को गंभीर त्रुटि मानते हुए पटवारी विजय कुमार ठाकुर की सेवा से बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ (जस्टिस सचिन सिंह राजपूत) ने मामले की सुनवाई करते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मोहला के बर्खास्तगी आदेश तथा कलेक्टर राजनांदगांव के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को तुरंत सेवा में बहाल करने और नियमानुसार सभी बकाए वित्तीय एवं सेवा लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता विजय कुमार ठाकुर को राजनांदगांव कलेक्टर द्वारा 4 जनवरी 2007 को पटवारी पद पर नियुक्त कर खैरागढ़ तहसील में पदस्थ किया गया था। वर्ष 2015 में उन पर पंचायत आम चुनाव से संबंधित कार्य न करने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने और 27 जनवरी 2015 को बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मोहला ने विभागीय जांच प्रक्रिया पूरी कर 13 मार्च 2015 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

Read More : IFS Vivek Acharya New Posting: 2006 बैच के आईएफएस अधिकारी विवेक आचार्य बने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कार्यकारी संचालक

पटवारी ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कलेक्टर राजनांदगांव के समक्ष अपील प्रस्तुत की थी। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क था कि अनुविभागीय अधिकारी उन्हें बर्खास्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं थे और विभागीय जांच में उन्हें जरूरी दस्तावेज व जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे वे प्रभावी रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके। हालांकि, कलेक्टर ने 13 अक्टूबर 2015 को यह अपील खारिज कर दी, और संभागीय आयुक्त ने भी 25 मई 2017 को दूसरी अपील को पोषणीय (Maintainable) न मानते हुए खारिज कर दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

Read More : JPNIC Controversy: अखिलेश यादव पर बरसे CM योगी, 864 करोड़ के खर्च का उठाया सवाल

बिलासपुर हाईकोर्ट ने मामले के पूरे रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद पाया कि जब विभाग ने नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी, तो उसे तय प्रक्रिया का ही अक्षरशः पालन करना अनिवार्य था। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के दौरान मनमाने ढंग से प्रशासनिक निर्देशों का सहारा लेकर वैधानिक नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

Read More : Nepal Disaster Impact: नेपाल आपदा में बिलासपुर की मंजू रॉय चौधरी लापता, 25 तारीख के बाद से परिजनों से टूटा संपर्क

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता को जांच रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज मुहैया न कराना संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत प्राप्त संरक्षण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने माना कि उचित अवसर न मिलने के कारण याचिकाकर्ता अपना प्रभावी बचाव नहीं कर पाया, जिसके आधार पर कोर्ट ने बर्खास्तगी और अपील खारिज करने के आदेशों को सिरे से खारिज करते हुए बहाली का फैसला सुनाया।

Share The News
Share This Article
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *