नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Nepal Floods India Impact: नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और तेज जल प्रवाह ने पड़ोसी देश भारत की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। नेपाल में नदियों का बढ़ता प्रवाह केवल उसके अपने भूभाग तक सीमित नहीं है, क्योंकि वहां की मुख्य त्रिशूली नदी अंततः नारायणी-गंडक नदी प्रणाली में समाहित हो जाती है। इस वजह से नेपाल में अचानक पानी की मात्रा बढ़ने से भारतीय सीमाओं में प्रवेश करने वाली गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा त्रिशूली और गंडक प्रणाली में अचानक जलस्तर बढ़ने की आधिकारिक चेतावनी के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिला प्रशासनों ने व्यापक सतर्कता और तैयारियां शुरू कर दी हैं।
गंडक नदी, जो नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से निकलकर भारतीय मैदानी भागों में आती है, वर्तमान में उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों के लिए मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के संभावित जोखिम के कारण स्थिति और संवेदनशील हो गई है। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में स्थित हिमनद झीलों से अचानक पानी छोड़े जाने से निचले मैदानी इलाकों पर पानी का भारी दबाव बनता है। इस बढ़ते जलप्रवाह को प्रबंधित करने और नदी प्रणाली पर दबाव कम करने के उद्देश्य से बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि नगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं ताकि पानी की सुरक्षित निकासी हो सके।
उल्लेखनीय है कि केवल गंडक ही नहीं, बल्कि नेपाल से निकलने वाली कई अन्य नदियां—जैसे कोसी, बागमती, कमला, घाघरा और राप्ती—भी भारतीय मैदानी क्षेत्रों के जल निकासी नेटवर्क को सीधे प्रभावित करती हैं। कोसी और बागमती जहां बिहार में भीषण बाढ़ का कारण बनती हैं, वहीं घाघरा और राप्ती नदियां उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भारी तबाही मचाती हैं। केंद्रीय जल आयोग और आपदा प्रबंधन टीमों से मिली जानकारी के अनुसार स्थिति के मद्देनजर बिहार के 9 जिलों (पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी आदि) और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों (जिनमें महाराजगंज और कुशीनगर प्रमुख हैं) में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
हालांकि, बैराज के रास्ते पानी की निरंतर निकासी होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में तत्काल एक बड़ी तबाही का खतरा काफी हद तक कम हुआ है और नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे नियंत्रित हो रहा है। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर किसी भी ढिलाई से इंकार किया गया है, क्योंकि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अतिरिक्त बारिश या भूस्खलन की स्थिति तुरंत हालात बिगाड़ सकती है। संवेदनशील व तटीय बस्तियों को एहतियातन खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके साथ ही एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर तैनात कर नदी तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।





