कांकेर। Nishaanebaz.com-Chhattisgarh Naxal Rehabilitation: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले अंतर्गत भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक माहौल में मनाया गया। कभी जंगलों में सुरक्षाबलों के खिलाफ हथियार उठाने वाली आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर भाईचारे और सुरक्षा का संकल्प लिया। जो हाथ कल तक जंगलों में बंदूक थामे आमने-सामने रहते थे, आज वे विश्वास के पवित्र धागे से जुड़ते नजर आए। यह दृश्य क्षेत्र में संघर्ष से शांति और हिंसा से मुख्यधारा की ओर बढ़ते सकारात्मक बदलाव की एक मिसाल बन गया।
पुनर्वास केंद्र में रह रहीं आत्मसमर्पित महिला शांति कवाची ने जीवन में पहली बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाने का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत उन्होंने खुद अपने हाथों से राखी बनाना सीखा था। उन्हीं हाथों से तैयार की गई राखियों को सुरक्षाबलों की कलाई पर बांधना उनके लिए एक बेहद खास और भावुक क्षण रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर ही उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया था और अब वे खुद को पूरी तरह से समाज की मुख्यधारा का हिस्सा मानती हैं।
चौगेल केंद्र में आत्मसमर्पित कैडरों को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाने का काम भी किया जा रहा है। केंद्र में सिलाई, काष्ठ शिल्प कला और राखी निर्माण जैसे विभिन्न कौशलों का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में सम्मानजनक आजीविका चला सकें। वहीं, राखी बंधवाने के बाद डीआरजी जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि पहले परिस्थितियां ऐसी थीं कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ मुस्तैद रहते थे, लेकिन आज वही हाथ कलाई पर सुरक्षा का धागा बांध रहे हैं। जवानों ने पूर्व नक्सलियों के लंबे और सुखी जीवन की कामना की।
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यह आयोजन सिर्फ एक त्योहार का उत्सव मात्र नहीं था, बल्कि राज्य में नक्सलवाद के खात्मे और शांति बहाली के प्रयासों का एक सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। पुनर्वास और कौशल विकास के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे ये लोग अब हथियार की जगह हुनर के बल पर सम्मानपूर्वक जीने का मार्ग चुन चुके हैं। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से भटके हुए अन्य लोगों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।





