[Nishanebaaz News]। Melanoma Skin Cancer mRNA Vaccine के तहत मेलानोमा (स्किन कैंसर की एक खतरनाक और गंभीर किस्म) के इलाज को लेकर चिकित्सा जगत से बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। प्रमुख फार्मा दिग्गज मॉडर्ना (Moderna) और मर्क (Merck) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई एक पर्सनलाइज्ड एमआरएनए (mRNA) थेरेपी को कैंसर के इलाज में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
इस प्रयोगात्मक वैक्सीन का नाम इंतिसमेरण औटोगेनए (Intisemeran Autogenea / V940) है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी एक फिक्स्ड फॉर्मूले पर बनाने के बजाय हर मरीज के ट्यूमर की विशिष्ट जेनेटिक संरचना के अनुसार अलग से डिजाइन किया जाता है।
ट्यूमर के हिसाब से हर मरीज के लिए बनेगी अलग थेरेपी
यह तकनीक सामान्य टीकों से पूरी तरह भिन्न है, जिन्हें स्वस्थ लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए लगाया जाता है।
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बनाने की प्रक्रिया: मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेकर उसमें हुए खास जेनेटिक बदलावों का विश्लेषण किया जाता है।
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नियोएंटीजन का चयन: इसके बाद ऐसे विशिष्ट एंटीजन चुने जाते हैं, जिन्हें मरीज का इम्यून सिस्टम आसानी से पहचान सके।
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शरीर का प्रशिक्षण: इसी जानकारी के आधार पर पर्सनलाइज्ड mRNA थेरेपी तैयार होती है, जो मरीज की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को ट्यूमर की पहचान कराकर उस पर हमला करने के लिए ट्रेंड करती है।
5 साल के फॉलो-अप डेटा में 49% तक कम हुआ कैंसर लौटने का खतरा
इस थेरेपी की जांच हाई-रिस्क स्टेज III और IV के मेलानोमा मरीजों पर की गई है, जिनका ट्यूमर सर्जरी के माध्यम से पूरी तरह निकाला जा चुका था। इस ट्रायल में V940 को मर्क की इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (Pembrolizumab) के साथ मिलाकर दिया गया।
2026 में सामने आए करीब 5 साल के फॉलो-अप डेटा के नतीजे काफी सकारात्मक रहे:
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अकेले कीट्रूडा दवा की तुलना में V940 और कीट्रूडा के कॉम्बिनेशन ने कैंसर के दोबारा लौटने या मरीज की मौत के जोखिम को 49 प्रतिशत तक कम कर दिया।
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शरीर के अन्य हिस्सों में कैंसर फैलने (Distant Metastasis) या मौत के खतरे में 59 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई।
आम मरीजों के लिए कब होगी उपलब्ध?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में V940 एक इन्वेस्टिगेशनल थेरेपी (Investigational Therapy) है, यानी इस पर अभी गहन क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।
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इसे अभी हर मेलानोमा मरीज के इलाज के लिए सामान्य रूप से व्यावसायिक मंजूरी नहीं मिली है।
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वर्तमान में Phase-3 का INTerpath-001 ट्रायल चल रहा है, जिसमें करीब 1,089 उच्च जोखिम वाले मरीजों को शामिल करने का लक्ष्य है।
एमआरएनए तकनीक का यह पर्सनलाइज्ड तरीका कैंसर से मुकाबला करने के लिए शरीर के अपने सिस्टम को ही सबसे बड़ा हथियार बना देता है। आगे के ट्रायल्स के बाद ही यह तय होगा कि यह थेरेपी आम जनता तक कब और कितनी प्रभावी रूप से पहुँच पाएगी।





