Simhastha Preparation Engineering Lapse: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश में साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उज्जैन में सड़क, पुल और दूसरी सुविधाओं से जुड़े कई बड़े काम किए जा रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निर्माण कार्य की प्लानिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।मामला इंदौर की ओर से उज्जैन आने वाले वाहनों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए बनाए जा रहे पुल से जुड़ा है। आरोप है कि पुल बनने के बाद पता चला कि वह सामने वाली सड़क से सही तरीके से जुड़ ही नहीं रहा है।
Simhastha Preparation Engineering Lapse का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह है कि पुल और सामने वाली सड़क के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर बताया जा रहा है।यानी पुल से उतरने वाला रास्ता सीधे सड़क पर जाने के बजाय खेत की ओर पहुंच रहा है। निर्माण के दौरान यह अंतर सामने क्यों नहीं आया, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।पुल का निर्माण लगभग पूरा होने के बाद अब इस गलती को सुधारने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सड़क को मोड़कर पुल से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।
खेत की जमीन लेने की तैयारी, किसान कर रहे विरोध
उज्जैन सिंहस्थ पुल विवाद में अब नया पेंच जमीन को लेकर सामने आया है। पुल को सड़क से जोड़ने के लिए आसपास की अतिरिक्त जमीन की जरूरत बताई जा रही है।बताया जा रहा है कि इसके लिए सड़क को मोड़ना पड़ेगा। लेकिन जिस जमीन की जरूरत पड़ रही है, वहां के किसान इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में निर्माण की गलती सुधारना अब आसान नहीं दिख रहा है।एक तरफ सिंहस्थ की समय सीमा नजदीक आ रही है और दूसरी तरफ जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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₹23.26 करोड़ की सड़क, ₹13.38 करोड़ का पुल
Simhastha Preparation Engineering Lapse को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण का काम नगर निगम की तरफ से कराया जा रहा है। इसकी लागत करीब ₹23.26 करोड़ बताई गई है।वहीं पुल का निर्माण सेतु विभाग की जिम्मेदारी है और इसकी लागत करीब ₹13.38 करोड़ बताई गई है।दोनों काम अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी में होने के कारण अब यह सवाल भी उठ रहा है कि पुल और सड़क के बीच सही तालमेल क्यों नहीं बनाया गया।
नगर निगम ने सेतु विभाग को लिखा पत्र
Ujjain Bridge Construction से जुड़ी इस समस्या को लेकर नगर निगम की ओर से सेतु विभाग को पत्र भी लिखा गया है। नगर निगम का कहना है कि सड़क को पुल से जोड़ने के लिए जरूरी बदलाव पर ध्यान दिया जाना चाहिए।वहीं अधिकारियों की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि पुल का निर्माण तय डिजाइन के अनुसार ही किया जा रहा है और इसमें कोई गलती नहीं है। अधिकारियों ने निर्माण से जुड़ी गड़बड़ी के बारे में नगर निगम से जवाब मांगने की बात कही है।
आखिर गलती कहां हुई?
सिंहस्थ 2028 की तैयारी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पुल और सड़क अलग-अलग दिशा में जा रहे थे, तो निर्माण के शुरुआती चरण में इसका पता क्यों नहीं चला।पुल बनने के बाद करीब 30 डिग्री का अंतर सामने आने से डिजाइन, सर्वे और दोनों विभागों के बीच तालमेल पर सवाल उठ रहे हैं।अब प्रशासन के सामने दो चुनौती हैं—पहली, पुल को सड़क से जोड़ने का रास्ता निकालना और दूसरी, किसानों की जमीन को लेकर पैदा हुए विरोध का समाधान करना।
सिंहस्थ से पहले सुधारना होगा रास्ता
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में मेला क्षेत्र तक आने-जाने के लिए मजबूत और सही सड़क व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।Simhastha Preparation Engineering Lapse का यह मामला समय रहते सुलझाना जरूरी है, क्योंकि निर्माण में देरी का असर आगे चलकर यातायात व्यवस्था पर पड़ सकता है।फिलहाल सवाल यही है कि ₹13.38 करोड़ की लागत से बना यह पुल आखिर खेत में क्यों पहुंच गया और इसकी गलती की जिम्मेदारी किसकी होगी? अब प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई से ही पूरी तस्वीर साफ होगी।





