Tuesday, August 25, 2026
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Dhamtari Social Boycott Tarragondi Village: धमतरी के तर्रागोंदी में इंसानियत शर्मसार: साहू परिवार के 31 लोगों का 2 साल से सामाजिक बहिष्कार

धमतरी [Nishanebaaz News]। Dhamtari Social Boycott Tarragondi Village के तहत छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाला गंभीर मामला सामने आया है। जिले के भखारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तर्रागोंदी में पिछले दो वर्षों से साहू परिवार के 31 लोगों का जीना दूभर हो गया है।

बहिष्कृत परिवार में बुजुर्गों और महिलाओं के साथ 7 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। परिवार का कसूर सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि दो साल पहले उन पर गांव की जमीन पर अतिक्रमण कर घर बनाने का आरोप लगा था, जिसके बाद गांव की पंचायत ने सर्वसम्मति से उनका ‘हुक्का-पानी’ बंद कर सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

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मासूम बच्चों को बिस्किट-चॉकलेट देने से मना करते हैं दुकानदार

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि पंचायत के फरमान के बाद गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे बातचीत नहीं करता। खेतों में मजदूरी या काम करने के लिए कोई नहीं आता। दुख की बात यह है कि परिवार के छोटे-छोटे मासूम बच्चे जब गांव की दुकानों पर बिस्किट या चॉकलेट लेने जाते हैं, तो दुकानदार उन्हें यह कहकर सामान देने से साफ मना कर देते हैं कि “तुम्हारे लिए कुछ नहीं है, यहां से चले जाओ।”

परिवार का आरोप है कि गांव में जयराम नामक व्यक्ति का दबदबा है और उसके इशारे पर ही यह सब हो रहा है। यदि गांव का कोई व्यक्ति इंसानियत दिखाते हुए पीड़ित परिवार से बात भी कर लेता है, तो पंचायत द्वारा उस पर भारी अर्थदंड (जुर्माना) लगा दिया जाता है।

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जरूरतों के लिए जाना पड़ता है दूसरे गांव, खुली जेल जैसा जीवन

बहिष्कार झेल रहे साहू परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे पिछले दो साल से अपने ही गांव में किसी बंधक या खुली जेल की तरह रहने को मजबूर हैं। दैनिक उपयोग की राशन सामग्री, दवाएं और सब्जियां खरीदने के लिए उन्हें अपने गांव की सरहद पार कर पड़ोसी गांवों का रुख करना पड़ता है।

बीमार पड़ने पर डॉक्टरों की सुविधा के लिए भी दूसरे गांव की तरफ दौड़ना पड़ता है। 31 सदस्यों वाला यह परिवार अपने ही पैतृक गांव में पूरी तरह अजनबी और बेगाना बना दिया गया है।

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पीड़ितों ने कलेक्टर कार्यालय में लगाई इंसाफ की गुहार

लगातार प्रताड़ना झेलने के बाद थक-हारकर पीड़ित परिवार मंगलवार को धमतरी कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और प्रशासनिक अधिकारियों को आपबीती सुनाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

हालांकि, इस घटना ने प्रशासनिक तंत्र और स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर दो साल तक इतने बड़े पैमाने पर चल रहे सामाजिक बहिष्कार की जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं लगी।

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