Bilaspur High Court: बिलासपुर। कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed की अनिवार्य योग्यता से छूट की मांग कर रहे 65 अभ्यर्थियों को बिलासपुर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और पात्रता तय करना राज्य सरकार तथा नियम बनाने वाली संस्था के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट अपनी ओर से अनिवार्य योग्यता में छूट नहीं दे सकता।
Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed की योग्यता मौजूदा भर्ती नियमों का हिस्सा है। निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी किए बिना किसी अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
Bilaspur High Court: क्या है पूरा मामला?
65 अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वर्ष 2019 में लागू पात्रता व्यवस्था के तहत कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed अनिवार्य नहीं था। बाद में अशोकानंद पटेल व अन्य बनाम राज्य शासन मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 5 फरवरी 2025 को कृषि शिक्षकों को दी गई B.Ed संबंधी छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed को अनिवार्य योग्यता बना दिया।
Bilaspur High Court: अभ्यर्थियों ने मांगी थी सशर्त अनुमति
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे पुरानी पात्रता व्यवस्था के आधार पर कृषि शिक्षक भर्ती के लिए योग्य थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें B.Ed की योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
मौजूदा भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी किया गया है और आवेदन की अंतिम तारीख 2 सितंबर 2026 निर्धारित है। अभ्यर्थियों ने मांग की थी कि उन्हें B.Ed के बिना आवेदन करने और भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। साथ ही सफल होने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर B.Ed पूरा करने की शर्त रखने का आग्रह किया गया था।
कोर्ट ने पुरानी छूट को लेकर क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि डिवीजन बेंच पहले ही वर्ष 2019 के नियमों में कृषि शिक्षकों को B.Ed, D.El.Ed और TET संबंधी छूट को असंवैधानिक घोषित कर चुकी है। साथ ही राज्य सरकार को NCTE विनियम, 2014 के अनुरूप B.Ed योग्यता शामिल करने का निर्देश दिया गया था।
ऐसे में वर्तमान नियमों में निर्धारित योग्यता के बिना अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल करने की अनुमति देना अनिवार्य पात्रता में न्यायिक अपवाद बनाने जैसा होगा।
कोर्ट ने कहा- पात्रता में छूट देना सरकार का अधिकार
Bilaspur High Court: जस्टिस बीडी गुरु की अदालत ने कहा कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, पात्रता मानदंड और सेवा नियम तय करना राज्य सरकार या नियम बनाने वाली संस्था का अधिकार है। अदालत अपनी राय को सरकार के निर्णय की जगह नहीं रख सकती और व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए अनिवार्य भर्ती मानदंड में छूट नहीं दे सकती।
Bilaspur High Court: अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा मुख्य रूप से यह देखने तक सीमित है कि सरकार का फैसला मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या असंवैधानिक तो नहीं है। कोर्ट खुद से कोई नई पात्रता या छूट निर्धारित नहीं कर सकता। इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट ने 65 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी।





