Wednesday, August 19, 2026
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नमक समझकर खिला दिया डिटर्जेंट! बिहार के स्कूल में मिड-डे मील खाते ही 34 बच्चों की बिगड़ी हालत

Bihar Detergent Poisoning Incident: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- बिहार के नालंदा जिले से स्कूल के मिड-डे मील से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नूरसराय प्रखंड के परासी स्थित सरकारी स्कूल में खाना खाने के बाद 34 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना के बाद बच्चों को इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की।शुरुआती जानकारी के मुताबिक, स्कूल में बच्चों को चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी। इसी दौरान कुछ बच्चों ने खाने के साथ अतिरिक्त नमक मांगा। आरोप है कि इसी समय एक रसोइया ने कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर उठा लिया और उसे खाने में डाल दिया। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना की वजह यही गलती बताई जा रही है।

बताया गया कि डिटर्जेंट मिला खाना खाने के कुछ समय बाद बच्चों ने गले और पेट में दर्द की शिकायत शुरू कर दी। कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।स्कूल प्रबंधन को जब खाने में हुई कथित गलती की जानकारी मिली तो बच्चों को तत्काल प्राथमिक मदद देने की कोशिश की गई। इसके बाद प्रभावित बच्चों को अस्पताल ले जाया गया। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना में सभी प्रभावित बच्चों को मेडिकल जांच और इलाज के लिए अस्पताल में रखा गया।

132 बच्चों को परोसा गया था भोजन
जानकारी के अनुसार, स्कूल में उस समय कुल 132 बच्चों को मिड-डे मील परोसा गया था। इनमें से 34 बच्चों की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आई है।अधिकारियों के मुताबिक, सभी प्रभावित बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना के बाद डॉक्टर लगातार बच्चों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

नमक की जगह डिटर्जेंट कैसे पहुंचा खाने में?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रसोई में नमक और डिटर्जेंट को लेकर ऐसी गलती कैसे हुई। अगर जांच में यह बात सही साबित होती है कि डिटर्जेंट को नमक समझकर खाने में डाला गया, तो यह स्कूल की रसोई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना के बाद अब प्रशासन यह भी देख सकता है कि रसोई में खाद्य सामग्री और सफाई में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों को किस तरह रखा जाता था और क्या दोनों के लिए अलग व्यवस्था थी।
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खाने के सैंपल की होगी जांच
घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने मिड-डे मील के खाने का नमूना जांच के लिए भेजने की बात कही है। जांच रिपोर्ट से यह साफ करने में मदद मिलेगी कि खाने में वास्तव में कौन सा पदार्थ मिला था और उसकी मात्रा कितनी थी।मामले की जांच के दौरान भोजन की तैयारी और वितरण से जुड़े दूसरे पहलुओं को भी देखा जा सकता है। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना में खाने के नमूने की रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है।

केंद्रीय रसोई से आता है मिड-डे मील
अधिकारियों के अनुसार, संबंधित स्कूल में मिड-डे मील की आपूर्ति एक केंद्रीय रसोई के माध्यम से की जाती है। इसी व्यवस्था के तहत आसपास के कई प्रखंडों के स्कूलों में भोजन भेजा जाता है।ऐसे में जांच केवल स्कूल तक सीमित रहेगी या भोजन की पूरी सप्लाई व्यवस्था को भी देखा जाएगा, यह आगे स्पष्ट होगा। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना के बाद भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना
घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी अस्पताल जाकर बच्चों की स्थिति की जानकारी ली।उन्होंने डॉक्टरों को बच्चों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल सबसे राहत की बात यह है कि अधिकारियों के अनुसार सभी प्रभावित बच्चे खतरे से बाहर हैं। हालांकि, स्कूल में खाने के दौरान हुई कथित गलती ने मिड-डे मील की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अब खाने के नमूने की जांच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डिटर्जेंट खाने में कैसे पहुंचा और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है। बिहार डिटर्जेंट पॉइजनिंग घटना में आगे की जांच पर अब सभी की नजर बनी हुई है।

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