Saturday, August 15, 2026
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CG Nursing Admission New Rules 2026: छत्तीसगढ़ में नर्सिंग प्रवेश के नए नियम लागू: निजी कॉलेजों में 40% सीटें सरकारी कोटे की, जानिए काउंसलिंग और रिजर्वेशन का पूरा गणित

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रायपुर [Nishanebaaz News]CG Nursing Admission New Rules 2026। छत्तीसगढ़ में बीएससी नर्सिंग, जीएनएम सहित अन्य नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर राज्य सरकार के आवास एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा नए नियम व गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। शासन द्वारा जारी अधिसूचना के बाद अब प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी नर्सिंग कॉलेजों में सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया इन्हीं नए प्रावधानों के तहत संपन्न होगी।

शासन के इस फैसले से जहां निजी संस्थानों की फीस और सीटों में पारदर्शिता आएगी, वहीं राज्य के मेधावी व जरूरतमंद छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

प्रवेश प्रक्रिया: एंट्रेंस टेस्ट और मेरिट का फार्मूला

नए नियमों के अनुसार नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के तरीके को स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है:

  • बीएससी नर्सिंग (B.Sc Nursing): बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा (Entrance Test) में शामिल होना अनिवार्य होगा।

  • जीएनएम (GNM): जीएनएम (General Nursing and Midwifery) पाठ्यक्रम में दाखिला 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों (Merit List) के आधार पर दिया जाएगा।

  • आयु सीमा: नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 31 दिसंबर तक 17 वर्ष होनी अनिवार्य है।

सीटों का कोटा और आरक्षण व्यवस्था

निजी और सरकारी दोनों प्रकार के संस्थानों में सीटों के आवंटन के लिए नया कोटा सिस्टम तय किया गया है:

कॉलेज का प्रकार सीट कोटा / श्रेणी प्रतिशत/आरक्षण
निजी नर्सिंग कॉलेज सरकारी कोटा (Govt Quota) 40% सीटें
निजी नर्सिंग कॉलेज प्रबंधन/ओपन कोटा (Management Quota) 60% सीटें
शासकीय नर्सिंग कॉलेज इन-सर्विस कर्मचारी आरक्षण (In-Service Staff) 20% सीटें

पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, पारदर्शिता पर जोर

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और ऑनलाइन रखी गई है। अभ्यर्थियों को विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके बाद मेरिट और पसंद (Choice Filling) के आधार पर ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिए सीटें आवंटित की जाएंगी।

राज्य सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से निजी कॉलेजों की मनमानी पर लगाम लगेगी और ग्रामीण व मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी कम खर्च में नर्सिंग शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा।

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