Friday, September 25, 2026
Home Chhattisgarh Ambikapur Ambikapur Medical College Hospital Under Fire: अस्पताल ने जारी किया मृत्यु प्रमाण...

Ambikapur Medical College Hospital Under Fire: अस्पताल ने जारी किया मृत्यु प्रमाण पत्र, पर आयुष्मान रिकॉर्ड में मरीज रहा ‘जीवित’; सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Ambikapur Medical College Hospital Under Fire: अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना की कार्यप्रणाली पर एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अंबिकापुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जिस आरक्षक की 42 दिन पहले इलाज के दौरान मौत हो चुकी है और जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया जा चुका है, उसी मृतक के मोबाइल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मैसेज भेजा गया है— “प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।”

यह मामला जशपुर जिले के कटंगखार निवासी आरक्षक देवनारायण राम से जुड़ा है। उनका इलाज अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था, जहां 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई थी। मृतक की पत्नी सीमा कुजूर, जो स्वयं इसी अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं, ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति की महज 4 दिनों के इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बावजूद आयुष्मान योजना के डिजिटल पोर्टल और रिकॉर्ड में उन्हें कथित तौर पर 42 दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया।

प्रमुख बिंदु / विवरण अंबिकापुर आयुष्मान योजना लापरवाही मामले की जानकारी
घटना का स्थान शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अंबिकापुर (सरगुजा)
मृतक का नाम व पद देवनारायण राम (आरक्षक, निवासी- कटंगखार, जशपुर)
वास्तविक मृत्यु की तिथि 30 जून
प्राप्त संदेश का विषय “प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं”
संदेश प्राप्त होने का समय मृत्यु के लगभग 42 दिन बाद (आयुष्मान सारथी योजना द्वारा)
परिवार की मांग फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच एवं दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई

मृतक की पत्नी का आरोप है कि 42 दिनों तक कागजों में मरीज को जीवित और भर्ती दिखाना केवल एक तकनीकी गलती नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे आयुष्मान कार्ड से अवैध क्लेम या भुगतान उठाने की बड़ी धांधली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पति के निधन के इतने दिनों बाद इस तरह का संदेश मिलना परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

स्वास्थ्य विभाग अब इस बात की जांच के घेरे में है कि क्या मरीज की मौत के बाद भी उनके नाम पर फंड क्लेम किया गया या यह पोर्टल में डेटा अपडेट न होने की एक गंभीर तकनीकी चूक है। पीड़ित परिवार ने दोषी कर्मचारियों पर सख्त कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here