CGMSCL Medicine Tender Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया और रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि एक ही फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया और नियमों में बार-बार बदलाव किए गए। मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता गिरीश अग्रवाल के अनुसार, जिस फर्म का रेट कॉन्ट्रैक्ट 18 महीने के लिए वैध था, उसे पहले 6 महीने के लिए एक्सटेंशन दिया गया। इसके बाद लंबे समय तक चली प्रक्रिया के बाद संबंधित टेंडर को रद्द कर नए सिरे से टेंडर जारी किए गए। शिकायत में इसी पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और औचित्य पर सवाल उठाया गया है।
18 महीने का RC, फिर 6 महीने का एक्सटेंशन
शिकायत के मुताबिक, CGMSCL की ओर से Tender No. 10/AYUR-Classical और 11/AYUR-Classical को 20 नवंबर 2025 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के दौरान संबंधित फर्म के रेट कॉन्ट्रैक्ट को 18 महीने की निर्धारित अवधि के बाद भी 6 महीने के लिए बढ़ाया गया।
शिकायतकर्ता का सवाल है कि जब नई टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी? आरोप है कि इसी एक्सटेंशन के जरिए संबंधित फर्म को सप्लाई जारी रखने का अवसर मिला।
17 महीने बाद टेंडर रद्द करने पर सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित टेंडर को करीब 17 महीने बाद 22 जुलाई 2026 को रद्द कर दिया गया। इसके बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में नियमों या तकनीकी स्तर पर कोई गंभीर खामी थी, तो उसे पहले ही स्पष्ट किया जाना चाहिए था। इतने लंबे समय तक प्रक्रिया चलने और उसके बाद टेंडर रद्द किए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
चार नए टेंडर, Cover-A खुलने के बाद भी विवाद
इसके बाद CGMSCL की ओर से Tender No. 10, 11, 12 और 13/AYUR-Classical जारी किए गए। शिकायत के अनुसार इन टेंडरों को 22 जून 2026 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया और बिड जमा करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 रखी गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, टेंडर की Cover-A खोली जा चुकी है। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब नई टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बढ़ाने का आधार क्या है।
नियमों में बदलाव से किसे फायदा?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान किए गए कथित बदलावों का फायदा किसे मिला। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को बार-बार बदला गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि किसी कंपनी का लाइसेंस या अन्य पात्रता से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं हो रही थीं, तो उसे टेंडर प्रक्रिया में किस आधार पर आगे बढ़ाया गया।
आयुर्वेदिक दवाओं की सूची को लेकर भी आपत्ति
मामले में आयुर्वेदिक दवाओं की सूची को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि कुछ ऐसी दवाओं को भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिनकी पात्रता और सूची में शामिल किए जाने को लेकर आपत्ति है।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टेंडर की शर्तों में बदलाव नियमों के तहत किए गए या किसी विशेष फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी शिकायत का संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। मंत्री ने कहा है कि दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
CGMSCL Medicine Tender Scam: जांच में सामने आएगा पूरा खेल
CGMSCL Medicine Tender Scam: शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में रेट कॉन्ट्रैक्ट के एक्सटेंशन, पुराने टेंडर को रद्द करने, नए टेंडर जारी करने, Cover-A खोलने और कथित नियम संशोधनों की जांच की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि पूरी प्रक्रिया में किसी अधिकारी या फर्म को अनुचित लाभ मिला या नहीं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप शिकायत के आधार पर हैं। CGMSCL और संबंधित फर्म का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।




