Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी पर बिना इन मंत्रों के अधूरी मानी जाती है पूजा! जानिए पूरी सूची

Rahul Goshwami

Devshayani Ekadashi Mantra 2026: देवशयनी एकादशी के मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास की शुरुआत होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखते हैं और विधि-विधान से श्रीहरि की पूजा करते हैं। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी को वर्ष की प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इसी दिन से चार महीने का चातुर्मास आरंभ होता है। इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवशयनी एकादशी के मंत्र के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होने की मान्यता है।

संकल्प मंत्र से करें पूजा की शुरुआत
देवशयनी एकादशी के मंत्र में सबसे पहले संकल्प मंत्र का जाप किया जाता है। सुबह स्नान कर पीले या साफ वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने जल और अक्षत लेकर संकल्प करें।

संकल्प मंत्र

“सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा।
धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।।
कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च।
श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।।”

इसके बाद अपना नाम, गोत्र और व्रत का संकल्प लेकर जल अर्पित करें।

शयन मंत्र का करें जाप
शाम की पूजा के बाद भगवान विष्णु को प्रतीकात्मक रूप से शयन कराया जाता है। इस समय देवशयनी एकादशी के मंत्र में शयन मंत्र का विशेष महत्व बताया गया है।

शयन मंत्र

“सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम।
विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।।”

इस मंत्र का 7, 11, 13 या 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र
पूरे दिन देवशयनी एकादशी के मंत्र के रूप में भगवान विष्णु के इन मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है।

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
  • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवाय।
  • ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।

इन मंत्रों के नियमित जाप से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है।

पूजा के अंत में करें क्षमा प्रार्थना
यदि पूजा के दौरान कोई त्रुटि हो जाए तो अंत में भगवान विष्णु से क्षमा मांगना शुभ माना जाता है। देवशयनी एकादशी के मंत्र में क्षमा मंत्र का भी विशेष स्थान है।

क्षमा मंत्र

“भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:।
कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।”

इस मंत्र का 3, 5, 7 या 11 बार जाप कर भगवान के चरणों में पुष्प या जल अर्पित करें।

देवशयनी एकादशी 2026: तिथि और पारण

पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी के मंत्र के साथ व्रत और पूजा का शुभ समय इस प्रकार है—

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, सुबह 9:12 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे
  • व्रत रखने की तिथि: 25 जुलाई 2026
  • पारण का समय: 26 जुलाई 2026, सुबह 5:39 बजे से 8:22 बजे तक

देवशयनी एकादशी पर श्रद्धा, नियम और सही विधि से पूजा करने का विशेष महत्व है। देवशयनी एकादशी के मंत्र का जाप संकल्प, शयन और क्षमा प्रार्थना के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। यदि व्रत के दौरान पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन किया जाए तो यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बन सकता है।

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