Mauganj News: मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद बेघर हुए आदिवासी परिवारों का दर्द अब सड़कों पर उतर आया है। लगातार 21 दिनों से बिना छत और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जीवन गुजार रहे 30 से अधिक आदिवासी परिवारों ने सोमवार को दलित-आदिवासी महासभा के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना देते हुए गेट जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने मानसून के बीच उनके घर तो गिरा दिए, लेकिन पुनर्वास का वादा आज तक पूरा नहीं किया। बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवारों का कहना है कि अब उनके पास न सिर छिपाने की जगह है और न ही बच्चों को सुरक्षित रखने का कोई साधन।
मानसून में उजड़ गया आशियाना, 21 दिन बाद भी नहीं मिला नया ठिकाना
Mauganj News: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, झऊरा सहित आसपास के गांवों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने उनके मकानों को ध्वस्त कर दिया था। उस समय अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि सात दिनों के भीतर पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी, लेकिन तीन सप्ताह गुजर जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों को न जमीन मिली और न ही रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था।
परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई इतनी अचानक की गई कि उन्हें घर का सामान तक समेटने का समय नहीं मिला। आज स्थिति यह है कि पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर है।
बारिश की हर बूंद बन रही मुसीबत, बच्चों और बुजुर्गों का हाल बेहाल
Mauganj News: बेघर हुए परिवारों का कहना है कि मानसून उनके लिए किसी आपदा से कम नहीं है। तेज बारिश होते ही पूरा परिवार प्लास्टिक की चादरों के नीचे शरण लेने को मजबूर हो जाता है। कई बार तेज हवा में ये चादरें भी उड़ जाती हैं और पूरा सामान भीग जाता है।
महिलाओं ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे लगातार बारिश और ठंड के कारण बीमार पड़ रहे हैं। खाने-पीने का सामान सुरक्षित नहीं रह पाता, कपड़े सूख नहीं पाते और पूरी रात जागकर बच्चों की सुरक्षा करनी पड़ती है।
महिलाओं का दर्द: ‘हमारे बच्चों का क्या कसूर?’
धरने के दौरान कई महिलाओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि गरीब होना क्या इतना बड़ा अपराध है कि प्रशासन बिना कोई व्यवस्था किए उनके सिर से छत ही छीन ले?महिलाओं ने कहा कि उनके बच्चों की पढ़ाई छूट रही है, बारिश में किताबें भीग रही हैं और हर दिन डर और असुरक्षा के माहौल में गुजर रहा है।
दलित-आदिवासी महासभा ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
Mauganj News: दलित-आदिवासी महासभा के जिला अध्यक्ष बुद्धसेन साकेत ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने सात दिन में पुनर्वास का आश्वासन दिया था, लेकिन 21 दिन बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भूमि आवंटन और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन और जिला स्तर पर बड़े प्रदर्शन भी किए जाएंगे।
एक घंटे तक बंद रहा कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने कलेक्ट्रेट का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ। हालात को देखते हुए डिप्टी कलेक्टर रश्मि चतुर्वेदी, एसडीएम एस.पी. द्विवेदी और तहसीलदार वीरेंद्र पटेल मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने का भरोसा दिया।
सगरा गांव में होगा पुनर्वास, प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन
Mauganj News: तहसीलदार वीरेंद्र पटेल ने बताया कि झऊरा गांव में पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं है। इसलिए सगरा गांव के पास उपलब्ध सरकारी भूमि को पुनर्वास के लिए चिन्हित किया गया है।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीम जल्द ही मौके का निरीक्षण करेगी और जिन आदिवासी परिवारों के पास स्वयं की भूमि नहीं है, उन्हें पात्रता के अनुसार भूखंड आवंटित किए जाएंगे।प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त कर दिया।
अतिक्रमण हटाना जरूरी था, लेकिन पुनर्वास क्यों नहीं?
यह पूरा मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी गरीब परिवार का घर हटाना जरूरी था, तो पहले उसके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।मानसून के बीच बेघर हुए परिवारों की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ मानवीय संवेदनाओं का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
अब आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई का इंतजार
Mauganj News: फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन शांत हो गया है, लेकिन प्रभावित परिवारों की उम्मीदें अब केवल वादों पर नहीं टिकी हैं। वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द उन्हें रहने के लिए स्थायी जमीन और सुरक्षित आशियाना मिले।
अब पूरे मऊगंज जिले की नजर इस बात पर है कि प्रशासन अपने वादे को कितनी जल्दी जमीन पर उतारता है, या फिर ये परिवार आने वाली बारिश भी खुले आसमान के नीचे बिताने को मजबूर होंगे।







