Chhattisgarh Joins the Movement: नई दिल्ली / रायपुर। देश के लोकतांत्रिक और सामाजिक परिदृश्य में इस समय एक बेहद विशाल और व्यापक जन-आंदोलन आकार ले रहा है। देश की जनता की सामूहिक आवाज को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान’ (Nationwide Signature Campaign) को हर वर्ग का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक स्थल वृंदावन के मुख्य परिक्रमा मार्ग में अब तक रिकॉर्ड 1,15,000 (एक लाख पंद्रह हजार) लोगों ने हस्ताक्षर कर इस अभियान के प्रति अपनी ठोस सहमति और एकजुटता प्रकट की है। अभियान के रणनीतिकारों ने अब आगामी 27 जुलाई 2026 को जिला मुख्यालयों में एक बड़े प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की तैयारी पूरी कर ली है।
27 जुलाई को कलेक्टरेट में दिखेगा जन-समर्थन का सैलाब
अभियान से जुड़े स्थानीय संयोजकों और पदाधिकारियों ने बताया कि वृंदावन में जुटाए गए ये 1.15 लाख हस्ताक्षर केवल एक शुरुआत हैं। पूरे जिले के विभिन्न ब्लॉक, तहसीलों और गांवों में भी समानांतर रूप से टीमें काम कर रही हैं।
आगामी 27 जुलाई को जिले भर से संकलित किए गए हस्ताक्षरों को, जिनकी संख्या कई लाख होने का अनुमान है, एक विशाल जन-प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला कलेक्टरेट (Collectorate) पहुंचकर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। आयोजकों का दावा है कि यह दस्तावेज़ जनता की वास्तविक आकांक्षाओं और मांगों का एक अकाट्य प्रमाण होगा, जिसे नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए मुमकिन नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ और राजधानी रायपुर में भी अभियान चरम पर
यह अभियान केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के मध्य भाग यानी छत्तीसगढ़ में भी इसकी लहर बेहद तीव्र हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार, पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ विशेष रूप से राजधानी रायपुर में यह हस्ताक्षर अभियान अत्यंत योजनाबद्ध और जोर-शोर से चलाया जा रहा है।
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युवाओं और महिलाओं में क्रेज: रायपुर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी कॉलोनियों में विशेष काउंटर और बूथ लगाए गए हैं, जहां सुबह से शाम तक लोग स्वप्रेरणा से आकर अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं।
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स्थानीय नेतृत्व का समन्वय: छत्तीसगढ़ के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन इस अभियान को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं, ताकि 27 जुलाई तक राज्य के हर जिले से अधिकतम जन-भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
क्या है जनता के बीच इस भारी उत्साह की वजह?
जमीनी स्तर पर काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल विशेष का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आम जनता के अधिकारों, स्थानीय हितों और जन-भावनाओं से जुड़ा हुआ है। जब लोग देखते हैं कि उनकी बात को एक व्यवस्थित और अहिंसक तरीके से लाखों हस्ताक्षरों के माध्यम से शीर्ष स्तर तक ले जाया जा रहा है, तो उनका विश्वास इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में और मजबूत हो जाता है।







