Assembly Response: भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार (20 जुलाई 2026) से हंगामेदार अंदाज में शुरू हो गया है। सत्र के पहले ही दिन राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) का नाम बदलने को लेकर चल रही सियासी अटकलों पर राज्य सरकार ने बेहद महत्वपूर्ण जवाब दिया है। सरकार ने सदन में स्पष्ट किया है कि फिलहाल विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन या पटल पर नहीं लाया गया है।
यह जवाब कांग्रेस के युवा विधायक आतिफ आरिफ अकील द्वारा उठाए गए एक तारांकित सवाल के लिखित प्रतिउत्तर में सामने आया है।
कांग्रेस विधायक ने स्वतंत्रता सेनानी की विरासत पर उठाया सवाल
विधानसभा में कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने उच्च शिक्षा विभाग और इसके मंत्री इंदर सिंह परमार को घेरते हुए सवाल किया था कि क्या शासन ने वाकई बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई फैसला लिया है? उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार महान क्रांतिकारी डॉ. बरकतउल्ला भोपाली को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानती है या नहीं? यदि वह देश के स्वतंत्रता सेनानी थे, तो फिर उनका नाम हटाने या बदलने की राजनीति क्यों की जा रही है और क्या यह कदम सही है?
“अभी केवल जानकारी इकट्ठा की जा रही है” — मंत्री इंदर सिंह परमार
कांग्रेस विधायक के इस आक्रामक सवाल का जवाब देते हुए सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने कहा:
प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला: “जी नहीं, अभी शासन के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि, इस विषय के संबंध में विभिन्न स्तरों से जानकारी इकट्ठा की जा रही है। किसी भी विश्वविद्यालय का नाम बदलने की एक तय वैधानिक प्रक्रिया होती है; इसके लिए उस विश्वविद्यालय को शासित करने वाले मूल अधिनियम में संशोधन विधेयक के माध्यम से ही बदलाव किया जा सकता है।”
‘एक्जीक्यूटिव काउंसिल’ दे चुकी है मंजूरी, पर शासन स्तर पर पेंच फंसा
आपको बता दें कि इस मामले ने जून 2026 की शुरुआत में तब तूल पकड़ा था, जब बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (कार्यपरिषद) ने यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से यह माना जा रहा था कि भाजपा सरकार चालू मानसून सत्र में ही नाम बदलने के लिए संशोधन विधेयक ला सकती है।
नाम बदलने की राजनीति पर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
पिछले कुछ महीनों से भोपाल में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने को लेकर दक्षिणपंथी और हिंदू संगठन लगातार आंदोलन और मांग कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि भोपाल के ऐतिहासिक गौरव को वापस लाने के लिए राजा भोज के नाम पर ‘भोजपाल’ शब्द जोड़ना जनभावनाओं का सम्मान है, और वे कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस इस कदम का कड़ा विरोध कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विकास के असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए नाम बदलने की नाममात्र राजनीति का सहारा ले रही है। बहरहाल, सरकार के इस ताजा जवाब के बाद इस मुद्दे पर फिलहाल के लिए सियासी उबाल थोड़ा शांत होने की उम्मीद है।







