CG Assembly: छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक 2026’ पारित; मकान मालिकों और किरायेदारों को मिलेगा बेहतर कानूनी संरक्षण, 60 दिनों में होगा विवादों का निपटारा

VIKASH KHALKHO

CG Assembly: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। यह संशोधन प्रदेश में मकान मालिकों (भवन स्वामियों) और किरायेदारों के बीच के संबंधों को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी तथा संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

राज्य सरकार ने इस विधेयक को बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं और भारत सरकार के ‘आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021’ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया है।

विधेयक की 5 सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बातें:

1. उत्तराधिकारियों पर भी लागू रहेगा अनुबंध (एग्रीमेंट)

संशोधन के तहत अब यह कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है कि किरायेदारी अनुबंध (Rent Agreement) केवल मूल हस्ताक्षरकर्ताओं तक ही सीमित नहीं रहेगा। मूल पक्षों की मृत्यु होने या अन्य विशेष परिस्थितियों में भी यह अनुबंध उनके कानूनी उत्तराधिकारियों पर पूरी तरह लागू रहेगा, जिससे बेदखली या स्वामित्व के अनावश्यक विवाद नहीं उठेंगे।

2. ‘प्रॉपर्टी मैनेजर’ को मिली कानूनी मान्यता

महानगरों की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी संपत्तियों का प्रबंधन ‘प्रॉपर्टी मैनेजर्स’ के जरिए किए जाने के चलन को कानूनी जामा पहनाया गया है। इस संशोधन में पहली बार ‘प्रॉपर्टी मैनेजर’ को विधिक रूप से परिभाषित कर उनके अधिकार, दायित्व और अधिकारों के दुरुपयोग पर कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं।

3. किराया स्वीकार न करने पर जमा करने की नई व्यवस्था

कई बार मकान मालिक और किरायेदार के विवाद में मकान मालिक जानबूझकर किराया लेने से इनकार कर देते हैं, ताकि किरायेदार को डिफाल्टर सिद्ध किया जा सके। अब ऐसी स्थिति से निपटने के लिए नई व्यवस्था दी गई है, जिसके तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर किराया सरकारी तौर पर जमा कराया जा सकेगा, जिससे किसी भी पक्ष का अहित नहीं होगा।

4. 60 दिनों के भीतर विवादों का निपटारा

भाड़ा नियंत्रण अधिकरण (Rent Control Tribunal) की कार्यप्रणाली को और तेज करने के लिए नियमों में कड़ा सुधार किया गया है:

  • कोर्ट में अनावश्यक स्थगनों (तारीख पे तारीख) पर सख्त रोक लगाई जाएगी।

  • किसी भी मामले में अधिकतम केवल 3 बार ही स्थगन (Adjournment) मिल सकेगा।

  • अधिकरण को यथासंभव 60 दिनों के भीतर मामलों का अंतिम निराकरण करने का प्रयास करना होगा।

  • अधिकरण को सिविल कोर्ट की तरह समन जारी करने की शक्तियां भी प्रदान की गई हैं।

आवासीय किराया बाजार को मिलेगी नई गति

राज्य सरकार का मानना है कि इस संशोधन के लागू होने से प्रदेश के रियल एस्टेट और रेंटल मार्केट को नई गति मिलेगी। मकान मालिकों में अपनी संपत्ति किराये पर देने को लेकर सुरक्षा का भाव जगेगा, वहीं किरायेदारों को भी अनुचित दबाव या अचानक बेदखली से कानूनी संरक्षण मिलेगा। यह कानून छत्तीसगढ़ में सुशासन और त्वरित न्याय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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