Saturday, August 15, 2026
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‘पानी रोका तो काट देंगे हाथ…’ सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की भारत को फिर गीदड़भभकी

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Indus Waters Treaty Dispute: सिंधु जल संधि विवाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। पाकिस्तान की शहबाज सरकार के एक मंत्री ने भारत को लेकर तीखा बयान दिया है। इस बयान के बाद सिंधु जल संधि विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

सिंधु जल संधि विवाद के बीच पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने प्रेस वार्ता में कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने की कोशिश की तो उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। उनका यह बयान भारत-पाक रिश्तों में जारी तनाव के बीच आया है।

भारत के फैसले के बाद बढ़ी नाराजगी
सिंधु जल संधि विवाद उस समय और तेज हो गया जब भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संधि से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं पर अपना रुख कड़ा किया। इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता जाहिर करता रहा है। अब पाक सरकार के मंत्री का बयान इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि विवाद की जड़ 1960 में हुई सिंधु जल संधि है। विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता हुआ था। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल बंटवारे का नियम तय किया गया था। कई दशक तक यह समझौता दोनों देशों के बीच लागू रहा, लेकिन समय-समय पर इसे लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

पहलगाम हमले के बाद बदले हालात
सिंधु जल संधि विवाद में नया मोड़ उस समय आया जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई द्विपक्षीय व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू की। इसी दौरान जल समझौते से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सख्त रुख अपनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
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पाकिस्तान क्यों दिखा रहा सख्ती?
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि विवाद पाकिस्तान के लिए केवल पानी का नहीं बल्कि कृषि, अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की जरूरतों से जुड़ा मुद्दा है। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार इस विषय पर लगातार कड़े बयान दे रही है। हालांकि ऐसे बयान समाधान के बजाय तनाव बढ़ाने वाले माने जाते हैं।

भारत का रुख क्या है?
सिंधु जल संधि विवाद पर भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को प्राथमिकता देगा। भारत का कहना है कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। सरकार ने अभी तक पाकिस्तान के हालिया बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार सिंधु जल संधि विवाद का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से तनाव जरूर बढ़ सकता है, लेकिन किसी भी बड़े फैसले से पहले आधिकारिक वार्ता और अंतरराष्ट्रीय नियमों की भूमिका अहम रहेगी।

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