Thursday, October 1, 2026
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Police Commissionerate: रायपुर मॉडल के आधार पर बदलेगी न्यायधानी की पुलिसिंग: अपराधियों को जिलाबदर करने का मिलेगा सीधा अधिकार

Police Commissionerate: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और तेजी से बढ़ते महानगर बिलासपुर की सुरक्षा व्यवस्था तथा कानून-व्यवस्था के ढांचे को विधिक रूप से अधिक प्रभावी, आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि राजधानी रायपुर की तर्ज पर भविष्य में बिलासपुर संभागीय मुख्यालय में भी ‘पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली’ (Police Commissionerate System) विधिक रूप से लागू की जा सकती है।

इस व्यवस्था के लागू होने से पुलिस के पूरे प्रशासनिक और कार्यकारी ढांचे में व्यापक स्तर पर बड़े विधिक सुधार देखने को मिलेंगे, जिससे बढ़ती आबादी और बदलते अपराधों की प्रकृति पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

सराफा एसोसिएशन के सम्मेलन में गृहमंत्री ने की विधिक घोषणा, रायपुर मॉडल के सफल परिणाम

रविवार को बिलासपुर प्रवास के दौरान स्थानीय सराफा एसोसिएशन के प्रांतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से विधिक चर्चा करते हुए यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बेहद सकारात्मक और विधिक रूप से मजबूत परिणाम सामने आए हैं।

इसी प्रशासनिक अनुभव को आधार बनाकर अब बिलासपुर सहित राज्य के अन्य प्रमुख संभागीय मुख्यालयों में भी इस प्रभावी मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय (PHQ) गंभीरता से विधिक कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।

मजिस्ट्रियल पावर मिलने से पुलिस को नहीं करना पड़ेगा प्रशासनिक अनुमति का इंतजार

कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद बिलासपुर पुलिस के विधिक अधिकारों में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। वर्तमान विधिक व्यवस्था के तहत पुलिस को कई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के लिए जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) या प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन नई व्यवस्था के बाद:

  • सीधे विधिक अधिकार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू करने, कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर लाठीचार्ज की विधिक अनुमति देने और आदतन अपराधियों को सीधे ‘जिलाबदर’ करने के दंडात्मक अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर (CP) के पास सुरक्षित होंगे।

  • शहरी एवं ग्रामीण पुलिसिंग का विसर्जन: शहर और ग्रामीण अंचलों की पुलिसिंग को दो अलग-अलग विधिक विंग में बांटकर संचालित किया जाएगा, जिससे औद्योगिक, वाणिज्यिक और रिहायशी इलाकों की सुरक्षा और विधिक निगरानी अधिक केंद्रित हो सकेगी।

एसएसपी की जगह कमिश्नर संभालेंगे कमान, नए थानों और बीएनएस की धाराओं पर विधिक मंथन

वर्तमान में बिलासपुर जिले की कानून-व्यवस्था की कमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के पास है, परंतु नई विधिक व्यवस्था लागू होते ही पूरा शहर अलग-अलग सुरक्षा जोनों में विभक्त हो जाएगा, जिनकी कमान पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर के अधिकारियों के हाथों में होगी। गृहमंत्री ने बिलासपुर की बढ़ती भौगोलिक सीमाओं को देखते हुए मंगला और मोपका में नए विधिक थानों की स्थापना के विसर्जन प्रस्तावों पर भी सकारात्मक निर्णय लेने की बात कही।

इसके साथ ही, सराफा व्यापारियों द्वारा नए कानून (BNS) की धारा 317 के तहत होने वाली विधिक और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाने की मांग पर सरकार ने गंभीरता से विचार करने का विधिक आश्वासन दिया है। बिलासपुर में हाईकोर्ट, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का जोनल मुख्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण यहां ऑनलाइन सट्टे, संगठित नशे के कारोबार और साइबर अपराधों से निपटने के लिए इस नए कमिश्नरेट सिस्टम को बेहद आवश्यक और मील का पत्थर माना जा रहा है।

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