Low-oil cooking: छुट्टी के दिनों या त्योहारों पर गर्मा-गर्म, गोल-गोल और फूली-फूली पूड़ियां खाना भला किसे पसंद नहीं होता। हालांकि, पारंपरिक रूप से पूड़ियों को तलने के लिए कड़ाही में ढेर सारे तेल की जरूरत होती है। इसके परिणामस्वरूप, जो लोग बढ़ते वजन, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, वे मन होने के बावजूद पूड़ी खाने से पूरी तरह परहेज करते हैं।
यदि आप भी अपनी पसंदीदा पूड़ी खाने से कतराते हैं, तो अब आपको अपनी जीभ पर नियंत्रण रखने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार, आप कुछ बेहद आसान और स्मार्ट कुकिंग टिप्स को अपनाकर पूड़ियों को बिल्कुल कम ऑयली और अत्यधिक पौष्टिक बना सकते हैं।
मैदे के बजाय मल्टीग्रेन आटे का करें उपयोग, हमेशा सख्त आटा गूंथने से कम सोखेगा तेल
आहार विज्ञान के नियमों के अनुसार, पूड़ी बनाने के लिए कभी भी मैदे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत, आपको हमेशा गेहूं या न्यूट्रिएंट्स से भरपूर मल्टीग्रेन आटे का ही चुनाव करना चाहिए। यह हाई फाइबर युक्त आटा आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह दुरुस्त रखता है।
इसके साथ ही, पूड़ी के लिए आटा गूंथते समय पानी की मात्रा कम रखें और हमेशा सख्त आटा ही तैयार करें। सख्त आटा होने की वजह से पूड़ियां तलते समय तेल को बहुत कम मात्रा में सोखती हैं, जिससे आपकी कैलोरी नियंत्रित रहती है।
धुएं वाले तेल का न करें दोबारा इस्तेमाल, हार्ट फ्रेंडली ऑयल से दिल रहेगा पूरी तरह सुरक्षित
कुछ घरों में एक बार इस्तेमाल किए जा चुके तेल को ही बार-बार गर्म करके पूड़ियां तली जाती हैं, जो कि सेहत के लिए एक विधिक अपराध जैसा है। दोबारा गर्म किए गए तेल में बेहद हानिकारक टॉक्सिक कम्पाउंड्स बन जाते हैं, जो सीधे दिल की बीमारियों को न्योता देते हैं।
यही कारण है कि पूड़ी तलने के लिए हमेशा एकदम फ्रेश और हाई स्मोक पॉइंट वाले ‘हार्ट फ्रेंडली’ तेल का ही चुनाव करना चाहिए। इसके लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला सूरजमुखी का तेल, मूंगफली का तेल, सरसों का तेल या राइस ब्रान ऑयल (चावल की भूसी का तेल) सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
कड़ाही में तेल अच्छी तरह गर्म होना जरूरी, एक साथ चार-पांच पूड़ियां तलने से घट जाता है तापमान
अक्सर लोग कड़ाही में तेल डालते ही हल्के गुनगुने तेल में ही पूड़ियां डाल देते हैं। ऐसा करने से पूड़ियां सही ढंग से फूलती नहीं हैं और आटे के भीतर अत्यधिक मात्रा में तेल समा जाता है। इसके अलावा, तेल जब पूरी तरह तेज गर्म हो जाए, तभी उसमें पूड़ी डालें ताकि वह तुरंत फूलकर ऊपर आ जाए और कम से कम तेल सोखे।
इसके साथ ही, कड़ाही में एक साथ चार-पांच पूड़ियां डालकर तलने की गलती कभी न करें। ऐसा करने से तेल का तापमान अचानक कम हो जाता है। परिणामस्वरूप, पूड़ियां कच्ची रह जाती हैं और ऑयली हो जाती हैं। इसलिए एक बार में अधिकतम दो पूड़ी ही तलें।
अखबार के पन्नों पर पूड़ी रखने से बचें, पेपर टॉवल का उपयोग सोख लेगा अतिरिक्त फैट
पूड़ियों को कड़ाही से बाहर निकालने के बाद उनके ऊपर जमा अतिरिक्त फैट हटाना बेहद जरूरी है। इसके लिए तली हुई पूड़ियों को हमेशा किचन पेपर टॉवल, मलमल के साफ कपड़े या एब्जॉर्बेंट पेपर नैपकिन पर ही रखें, ताकि वे अतिरिक्त तेल को पूरी तरह सोख लें।
हालांकि, इस विसर्जन प्रक्रिया के दौरान भूलकर भी अखबार या मैगजीन के पन्नों का इस्तेमाल न करें। अखबार में प्रयुक्त होने वाली केमिकल युक्त स्याही (इंक) गर्म तेल के संपर्क में आते ही पूड़ी पर चिपक जाती है, जो पेट के भीतर जाकर सीधे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकती है। अंततः, इन 7 आसान तरीकों को अपनाकर आप बिना किसी गिल्ट के हेल्दी पूड़ी का स्वाद ले सकते हैं।







