MPEB_Khandwa: खंडवा। खंडवा जिले में मानसून के आगमन के साथ ही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के दावों और मेंटेनेंस की पूरी तरह से पोल खुल गई है। मानसून पूर्व मेंटेनेंस के नाम पर घंटों की जाने वाली कटौती के बावजूद, पहली ही आंधी और बारिश ने शहर के कई इलाकों की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर दिया है। इससे नाराज और त्रस्त न्यू राजेंद्र नगर, लोहारी नाका और महादेवी नगर क्षेत्र की दर्जनों महिलाओं का गुस्सा शनिवार को फुट पड़ा। पिछले 5 से 6 दिनों से लगातार अंधेरे में जीवन-यापन करने को मजबूर आक्रोशित महिलाएं एकजुट होकर कहारवाड़ी (मछली बाजार) स्थित एमपीईबी (MPEB) के मुख्य उपकेंद्र पर पहुंच गईं और वहां जमकर हंगामा किया। महिलाओं के उग्र रूप को देखकर दफ्तर में मौजूद बिजली कर्मचारी और अधिकारी अपनी कुर्सियां छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए।
शिकायत नंबर ठप, टेलीफोन का रिसीवर नीचे रखने का आरोप
विद्युत कार्यालय का घेराव करने पहुंची महिलाओं ने बिजली कंपनी के मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि बिजली गुल होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकार और कंपनी द्वारा जो आधिकारिक टेलीफोन नंबर जारी किए गए हैं, उन पर कभी कॉल ही नहीं लगता। दफ्तर के अंदर बैठे कर्मचारी उपभोक्ताओं के फोन से बचने के लिए टेलीफोन का रिसीवर हमेशा नीचे उठाकर रख देते हैं। जब क्षेत्र के लोग परेशान होकर व्यक्तिगत रूप से शिकायत करने दफ्तर पहुंचे, तो कर्मचारी अंदर से दरवाजा बंद करके बैठ गए और बाहर खड़ी जनता की सुनने तक को तैयार नहीं हुए।
दफ्तर के दरवाजे पर मारी लात, मीटरों के कटआउट उखाड़े
कर्मचारियों की इस संवेदनहीनता को देखकर महिलाओं का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। गुस्साए उपभोक्ताओं ने बंद दफ्तर के दरवाजे पर जमकर लात मारी और खिड़कियों को ठोकते हुए सीधे तौर पर बिजली चालू करने की मांग की। इतने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो महिलाओं ने कहारवाड़ी दफ्तर के परिसर में लगे मीटर बोर्ड और मुख्य ग्रिड के कटआउट (फ्यूज) अपने हाथों से बाहर निकाल लिए। पीड़ित महिलाओं का कहना था कि आंधी-तूफान के कारण पूरा शहर प्रभावित हुआ था, लेकिन महज कुछ ही घंटों के भीतर बाकी पूरे शहर की विद्युत सप्लाई बहाल कर दी गई, जबकि उनके वार्डों को पिछले 6 दिनों से जानबूझकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
अंधेरे में सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का बना हुआ है खतरा
घेराव में शामिल स्थानीय निवासी आरती पटेल और सपना ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि आंधी-तूफान के बाद से ही उनके क्षेत्र की बत्ती पूरी तरह गुल है। उन्होंने सोचा था कि एक-दो दिन में लाइन ठीक हो जाएगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा:
“इतने दिनों से हम और हमारे छोटे-छोटे बच्चे उमस और घनघोर अंधेरे में रातें काट रहे हैं। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, ऐसे में लाइट न होने की वजह से घरों और गलियों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा हर समय सिर पर मंडराता रहता है। हमें प्रशासनिक आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल प्रभाव से बिजली सप्लाई चाहिए।”
इस भारी हंगामे और अधिकारियों के भाग खड़े होने के बाद अब स्थानीय पुलिस और बिजली कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन को मामले की जानकारी दी गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य शुरू कराया जा सके।







