Cyber Fraud Gwalior: डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसी रिटायर्ड महिला, 37 दिन में गंवाए 1.58 करोड़ रुपये

Cyber Fraud Gwalior: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन को 37 दिनों तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 1 करोड़ 58 लाख 90 हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को आईपीएस, सीबीआई और आरबीआई अधिकारी बताकर महिला को गिरफ्तारी का डर दिखाया और करोड़ों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए।
Cyber Fraud Gwalior: जानकारी के अनुसार, पीड़िता मीनाक्षी नाखरे स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उन्हें 10 मई को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली दूरसंचार विभाग का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर जारी एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है।
काले धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया शिकार
Cyber Fraud Gwalior: इसके बाद जालसाजों ने महिला को बताया कि उनके बैंक खाते में 6 करोड़ रुपये से अधिक का कथित काला धन जमा है और इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। अचानक लगे इस गंभीर आरोप से महिला घबरा गई और ठगों की बातों पर भरोसा कर बैठी।
Cyber Fraud Gwalior: साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय जैसा फर्जी माहौल तैयार किया। एक व्यक्ति ने खुद को आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया और कहा कि एक बैंक अधिकारी की गिरफ्तारी के दौरान मीनाक्षी नाखरे के नाम की फर्जी पासबुक बरामद हुई है। इसी आधार पर महिला पर लगातार दबाव बनाया गया।
37 दिनों तक चला डिजिटल अरेस्ट का खेल
Cyber Fraud Gwalior: पीड़िता के अनुसार, 37 दिनों तक उन्हें लगातार निगरानी और संपर्क में रखा गया। इस दौरान उन्हें किसी से भी चर्चा न करने की हिदायत दी गई। ठगों ने जांच और क्लीन चिट के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम जमा कराने को कहा।
Cyber Fraud Gwalior: 26 मई से 10 जून के बीच महिला ने कुल 1 करोड़ 58 लाख 90 हजार रुपये चार अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इनमें केरल के खाते में 60 लाख रुपये, कोलकाता के खाते में 40.90 लाख रुपये, रायपुर के खाते में 37.50 लाख रुपये और नासिक के खाते में 19.50 लाख रुपये भेजे गए।
NOC का झांसा देकर हुए फरार
Cyber Fraud Gwalior: आरोपियों ने महिला को भरोसा दिलाया था कि 11 जून तक उन्हें एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी कर दिया जाएगा। लेकिन 16 जून के बाद सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए और संपर्क पूरी तरह टूट गया। इसके बाद महिला को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम एवं क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।
Cyber Fraud Gwalior: पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और रकम ट्रांसफर किए गए बैंक खातों तथा संबंधित मोबाइल नंबरों की पड़ताल की जा रही है।
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