Sagar BMC Death Case: सागर BMC मौत मामला मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र पर कई सवाल खड़े कर रहा है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि बायोप्सी की तैयारी के दौरान मरीज को एक ऐसी दवा दी गई, जिसे विशेष निगरानी में दिया जाना चाहिए था। घटना के बाद पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है।
जानकारी के अनुसार सागर BMC मौत मामला में मृतक की पहचान देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि उन्हें गले में गांठ की समस्या थी, जिसके उपचार के लिए 10 जून को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बायोप्सी कराने का निर्णय लिया था।
बायोप्सी से पहले मंगवाया गया इंजेक्शन
परिवार के मुताबिक सागर BMC मौत मामला में बायोप्सी की तैयारी के दौरान अस्पताल स्टाफ ने एट्राक्यूरियम बेसीलेट इंजेक्शन की तीन वायल मंगवाई थीं। आरोप है कि दवा लाने के बाद एक वायल मरीज को लगा दी गई, जिसके कुछ ही मिनट बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
सांस लेने में परेशानी और बिगड़ी हालत
परिजनों के अनुसार सागर BMC मौत मामला में इंजेक्शन लगने के बाद मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उनका दावा है कि पल्स और हार्टबीट तेजी से गिरने लगी, जिसके बाद स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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डॉक्टरों ने किया लंबा उपचार
मेडिकल टीम ने सागर BMC मौत मामला में मरीज की स्थिति बिगड़ने के बाद तत्काल उपचार शुरू किया। जानकारी के अनुसार लगभग 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया। बाद में मरीज की धड़कन वापस आने पर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
कई दिनों तक चला इलाज
ताजा सागर BMC मौत मामला के अनुसार मरीज का कई दिनों तक उपचार जारी रहा। परिजनों को बताया गया था कि स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लेकिन बाद में उसकी हालत फिर बिगड़ गई। अंततः 23 जून की सुबह मरीज की मौत हो गई।
मोबाइल उपयोग को लेकर भी आरोप
परिजनों ने सागर BMC मौत मामला में यह आरोप भी लगाया है कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग कर रही थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रशासन ने भी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
एट्राक्यूरियम बेसीलेट क्यों है संवेदनशील दवा?
विशेषज्ञों के अनुसार सागर BMC मौत मामला में चर्चा में आई एट्राक्यूरियम बेसीलेट एक मसल रिलैक्सेंट दवा है। इसका उपयोग आमतौर पर ऑपरेशन थिएटर या एनेस्थीसिया प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। यह दवा शरीर की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर सकती है, इसलिए इसे प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में ही दिया जाता है।
जांच के केंद्र में कई अहम सवाल
सागर BMC मौत मामला में अब कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं। क्या दवा निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार दी गई थी? क्या एनेस्थीसिया विशेषज्ञ मौजूद थे? मरीज की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए? इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल सागर BMC मौत मामला में परिजनों ने लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। जांच के नतीजे आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।









