Health Tips: रायपुर। विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए एक बेहद जरूरी और अनिवार्य पोषक तत्व माना जाता है। यह शरीर में न केवल रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करता है, बल्कि नसों और ब्रेन को भी सुचारू रूप से चलाता है। इस जरूरी विटामिन की कमी होने पर आमतौर पर लोगों को थकान, कमजोरी और मूड में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं। हालांकि, कई बार इसके शुरुआती और मुख्य संकेत हमारे पैरों में भी नजर आने लगते हैं। लोग अक्सर इन संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
पैरों का हमेशा ठंडा रहना और त्वचा का पीला पड़ना
अगर आपके पैर सामान्य मौसम में भी हमेशा ठंडे रहते हैं, तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने से रेड ब्लड सेल्स का निर्माण बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके परिणामस्वरूप, शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन और ब्लड का फ्लो काफी कम हो जाता है। क्लिवलैंड क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, खराब ब्लड फ्लो के कारण ही पैरों में लगातार ठंडापन महसूस होने लगता है। इसके साथ ही, पैरों की त्वचा का सामान्य से अधिक पीला या हल्का पीला दिखाई देना भी एक बड़ा चेतावनी संकेत है। अमेरिकन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी की एक स्टडी के मुताबिक, बी12 की कमी से एनीमिया होने पर त्वचा का रंग फीका पड़ जाता है।
चलते समय संतुलन बिगड़ना और बार-बार लड़खड़ाना
चलते समय अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना या पैरों का बार-बार लड़खड़ाना भी इसी कमी का परिणाम हो सकता है। वास्तव में, विटामिन बी12 हमारी नसों के चारों ओर मौजूद सुरक्षात्मक परत ‘माइलिन’ को स्वस्थ रखने में मुख्य भूमिका निभाता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक शरीर में बी12 की कमी रहने से नसों के जरूरी सिग्नल्स प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि इंसान को चलने-फिरने और अपने शरीर का संतुलन बनाए रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को नजरअंदाज करने पर चलने की अक्षमता और बढ़ सकती है।
पैरों में लगातार जलन और सुई चुभने जैसा एहसास
कई लोगों को बिना किसी चोट या स्पष्ट कारण के भी पैरों में बार-बार तेज जलन की शिकायत रहती है। जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, कम बी12 स्तर वाले मरीजों में हाथों और पैरों में जलन की समस्या बहुत ज्यादा देखी गई है। यह सीधे तौर पर नसों के प्रभावित होने या उनमें गड़बड़ी आने का साफ संकेत होता है। इसके अलावा, पैरों में झुनझुनी होना या सुई चुभने जैसा अजीब एहसास होना इस बीमारी का सबसे आम लक्षण है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अनुसार, लंबे समय तक यह कमी बनी रहने पर हमारी नसों को हमेशा के लिए स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
समय पर डॉक्टर की सलाह और जांच है बेहद जरूरी
परिणामस्वरूप, अगर आपको अपने पैरों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन, जलन, ठंडापन या संतुलन खोने जैसी कोई भी समस्या महसूस हो, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। बिना किसी देरी के किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करके अपना ब्लड टेस्ट कराना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होगा।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह पूरी जानकारी विभिन्न रिसर्च स्टडीज और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे किसी भी तरह से सीधे मेडिकल सलाह का विकल्प बिल्कुल न माना जाए। अपने शरीर में किसी भी नए बदलाव या लक्षणों को दिखने पर सबसे पहले डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।









