Thursday, September 10, 2026
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Gharghoda Admin Apathy: प्रशासनिक अनुशासन तार-तार: सरकारी साहबों के लिए मुख्यालय बना सिर्फ कागजों का पता, रोज कर रहे अप-डाउन

Gharghoda Admin Apathy: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड घरघोड़ा के विभिन्न शासकीय विभागों से कार्यालयीन अनुशासन को पूरी तरह तार-तार कर देने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। शासन के बेहद कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद घरघोड़ा क्षेत्र में पदस्थ अधिकांश शासकीय अधिकारी और कर्मचारी अपने निर्धारित सरकारी मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं। इनके लिए मुख्यालय का पता अब सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। यह गैर-जिम्मेदार अमला रोजाना दूर-दराज के बड़े शहरों और अन्य कस्बों से अपनी सहूलियत के अनुसार अप-डाउन (आना-जाना) कर रहा है, जिससे समूचे ब्लॉक की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और शासकीय कामकाज का बंटाधार होने लगा है।

सुबह देर से आना और शाम को जल्दी भागना बनी अधिकारियों की आदत

स्थानीय भुक्तभोगी नागरिकों का सीधा आरोप है कि बड़े शहरों से रोजाना अप-डाउन करने के कारण ये साहब और बाबू कभी भी समय पर अपने कार्यालय नहीं पहुंचते हैं। सुबह आधा दिन बीत जाने के बाद दफ्तरों में इनकी आमद होती है, वहीं शाम ढलने से काफी पहले ही ये गाड़ियां उठाकर जल्दी निकल जाते हैं। इस लचर व्यवस्था का सीधा और सबसे बुरा असर ग्रामीण अंचलों से आने वाली गरीब जनता के जरूरी कामकाज पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी और विपरीत मौसम में दूरदराज के आदिवासी गांवों से बस का किराया लगाकर आने वाले ग्रामीणों को अपनी फाइलों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और अंत में बिना काम कराए ही निराश होकर लौटना पड़ता है।

“साहब रास्ते में हैं” कहकर टाल देते हैं मातहत कर्मचारी

ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले फरियादियों ने बताया कि जब वे किसी बेहद जरूरी राजस्व, स्वास्थ्य या कृषि कार्य के लिए दफ्तरों के भीतर पहुंचते हैं, तो कुर्सियां पूरी तरह खाली मिलती हैं। कुछ मामलों में वहां मौजूद छोटे कर्मचारियों द्वारा “साहब अभी रास्ते में हैं” या “आज साहब अचानक फील्ड विजिट पर बाहर गए हैं” जैसी मनगढ़ंत बातें कहकर सीधे-साधे ग्रामीणों को टाल दिया जाता है। लोगों का आरोप है कि मुख्यालय में रात को बड़े अधिकारियों के निवास नहीं करने के कारण प्रशासनिक कसावट और औचक निरीक्षण पूरी तरह से बंद हो चुके हैं, जिससे कर्मचारियों की जनता के प्रति जवाबदेही और कानून का डर लगभग समाप्त हो गया है।

आकस्मिक दुर्घटना या कानून व्यवस्था की स्थिति में कौन होगा जिम्मेदार?

जनता का बड़ा सवाल: क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन के सामने एक बड़ा और तार्किक सवाल उठाया है कि यदि रात के समय या सुबह जल्दी क्षेत्र में कोई भयंकर आपातकालीन स्थिति, बड़ी सड़क दुर्घटना, कानून व्यवस्था से जुड़ी गंभीर घटना या कोई राजस्व विवाद अचानक खड़ा हो जाए, तो मुख्यालय से पचास-सौ किलोमीटर दूर रहने वाले ये जिम्मेदार अधिकारी कितनी जल्दी मौके पर उपलब्ध हो पाएंगे?

जनता ने रायगढ़ जिला कलेक्टर से पुरजोर मांग की है कि घरघोड़ा के सभी सरकारी विभागों में एक विशेष जांच दल भेजकर औचक निरीक्षण कराया जाए और सभी कर्मचारियों के स्थानीय निवास का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कर अप-डाउन करने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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