Monday, September 7, 2026
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Gharghoda Pond Cleaning Controversy: घरघोड़ा में तालाब सफाई पर छिड़ी रार: विकास में रोड़ा अटकाने वालों या राजनीति चमकाने वालों पर उठे सवाल

Gharghoda Pond Cleaning Controversy: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़/घरघोड़ा। रायगढ़ जिले के नगर पंचायत क्षेत्र घरघोड़ा में इन दिनों तालाबों के कायाकल्प, जलकुंभी उन्मूलन और स्वच्छता अभियान को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस व्यापक सफाई अभियान पर कुछ स्थानीय गुटों और नेताओं द्वारा लगातार की जा रही बयानबाजी ने मामले को पूरी तरह सियासी रंग दे दिया है। जहां एक ओर नगर सरकार के समर्थक इसे शहर के इतिहास में वर्षों बाद हुआ ऐतिहासिक काम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उठ रहे विरोध के सुरों को लेकर आम जनता के बीच भी यह कौतूहल और बहस का विषय बन गया है कि आखिर जनहित के हर विकास कार्य में मीन-मेख निकालने की राजनीति क्यों की जा रही है?

विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने की पुरानी आदत का आरोप स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और नगर सरकार के समर्थकों का कहना है कि घरघोड़ा में जब भी जनहित या सौंदर्यीकरण से जुड़ा कोई बड़ा प्रोजेक्ट धरातल पर उतारा जाता है, तो कुछ गिने-चुने चेहरे हर बार बेबुनियाद आरोपों और व्यक्तिगत विरोध के साथ सामने आ जाते हैं। समर्थकों का आरोप है कि यह वही तथाकथित ‘विघ्नसंतोषी’ तत्व हैं जो खुद कभी रचनात्मक सहयोग नहीं करते, बल्कि हर अच्छे प्रयास में अड़ंगा डालकर शहर का माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। उनका साफ कहना है कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर आलोचना करना बेहद आसान है, लेकिन जमीन पर उतरकर बरसों पुराने उपेक्षित तालाबों से टनों जलकुंभी साफ करवाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है।

अभियान को मिल रहा है व्यापक जनसमर्थन नगर पंचायत के पक्ष में खड़े जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि तालाबों से जलकुंभी हटाने का काम पूरी पारदर्शिता और युद्ध स्तर पर जारी है। इस कार्य से न केवल भूजल स्तर (Water Table) में सुधार होगा, बल्कि आने वाले भीषण गर्मी के दिनों में नगरवासियों को जल संकट से भी बड़ी राहत मिलेगी। वर्षों से गंदगी और कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके तालाबों की सुधरती सूरत को देखकर वार्डों की आम जनता इस अभियान की सराहना कर रही है, और यही जमीनी हकीकत विरोधियों को रास नहीं आ रही है।

निजी एजेंडा और सोशल मीडिया वार से छवि धूमिल करने की कोशिश नगर पंचायत के रणनीतिकारों का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया और चुनिंदा समाचार माध्यमों के जरिए जानबूझकर एक ऐसा मनगढ़ंत नैरेटिव (माहौल) तैयार किया जा रहा है, जिससे चल रहे विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाए और नगर पंचायत प्रशासन की छवि धूमिल हो। समर्थकों ने तंज कसते हुए कहा कि यदि विरोध करने वालों को वास्तव में जनता और शहर के पर्यावरण की इतनी ही चिंता होती, तो वे केवल विरोध करने के बजाय प्रशासन को सुधार के लिए रचनात्मक सुझाव और बेहतर समाधान सौंपते।

बयानबाजी बनाम परिणाम: जनता करेगी अंतिम फैसला फिलहाल घरघोड़ा के तालाबों की सफाई को लेकर सोशल मीडिया से लेकर चौपालों तक आरोप-प्रत्यारोप और खींचतान का दौर बदस्तूर जारी है। लेकिन स्थानीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में पूरी तरह साफ-सुथरे तालाब, बेहतर जल संरक्षण और धरातल पर दिखने वाले वास्तविक परिणाम ही यह तय करेंगे कि कौन वास्तव में नगर के हित में पूरी ईमानदारी से काम कर रहा था और कौन केवल सुर्खियां बटोरने और विवाद खड़ा करने की सियासत में व्यस्त था। बहरहाल, इस सियासी जंग के बीच आम जनता की नजरें केवल इस बात पर टिकी हैं कि उनके वार्डों के तालाब कब तक पूरी तरह स्वच्छ और सुंदर बन पाते हैं।

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