Thursday, August 27, 2026
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Tehsildar Manish Mishra: “ये तो बोतल है, जबरदस्ती कुछ भी…”: तड़पते बुजुर्ग को ‘ड्रामा’ समझती रहीं तहसीलदार मनीषा मिश्रा; संवेदनहीनता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

Tehsildar Manish Mishra: श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला कलेक्ट्रेट (कलेक्टर कार्यालय) परिसर से मंगलवार (26 मई 2026) को एक ऐसी हृदयविदारक और विधिक रूप से झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समूचे प्रशासनिक ढांचे, लोक सेवा गारंटी के दावों और बुनियादी इंसानियत को पूरी तरह शर्मसार कर दिया है। साप्ताहिक जनसुनवाई सत्र के दौरान हफ्तों से न्याय की भीख मांग रहे एक लाचार बुजुर्ग फरियादी ने सिस्टम की घोर विधिक उपेक्षा से तंग आकर कलेक्ट्रेट प्रांगण में ही सरेआम जहरीला पदार्थ गटक लिया। तड़पते हुए बुजुर्ग को तत्काल जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी विधिक रूप से मृत्यु हो गई। इस त्रासदी के बीच, मौके पर तैनात प्रशासनिक अधिकारी (तहसीलदार) का एक अत्यंत असंवेदनशील, कस्टमाइज्ड और गैर-जिम्मेदाराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने भोपाल में बैठे शीर्ष नीति-नियंताओं तक हड़कंप मचा दिया है।

अपनों के अवैध कब्जे से टूट चुके थे देवेंद्र गोयल; कोतवाली पुलिस ने मूंद रखी थी आंखें

कलेक्ट्रेट परिसर और पीड़ित के करीबियों से प्राप्त कस्टमाइज्ड विधिक विवरण के अनुसार, आत्मघाती विधिक कदम उठाने वाले इस अभागे बुजुर्ग की पहचान गणेश बाजार (श्योपुर) निवासी श्री देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है।

  • अन्याय की विधिक पृष्ठभूमि: पीड़ित देवेंद्र गोयल का कस्टमाइज्ड और चीखता हुआ आरोप था कि उनके ही परिवार के कुछ रसूखदार और दबंग लोगों ने उनकी एकमात्र जीविका के साधन यानी दुकान और भीतर रखे तमाम कीमती व्यावसायिक सामान पर जबरन विधिक रूप से अवैध कब्जा (Encroachment) कर लिया है।

  • दफ्तरों की अंतहीन दौड़: बुजुर्ग पिछले 3-4 साप्ताहिक जनसुनवाई सत्रों से कलेक्ट्रेट की चौखट पर अपनी अर्जी लेकर आ रहे थे। उन्होंने स्थानीय कोतवाली थाने में भी नामजद विधिक शिकायत दर्ज कराई थी। परंतु, कथित भू-माफिया और रसूखदारों के विधिक व आर्थिक प्रभाव के आगे पुलिस और स्थानीय राजस्व अमले ने अपनी आंखें पूरी तरह मूंद रखी थीं, जिससे थक-हारकर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट को ही अपनी विधिक मृत्युशैया बना लिया।

“ये तो बोतल है, नाटक हो रहा है…”; कैमरे में कैद हुई तहसीलदार मनीषा मिश्रा की संवेदनहीनता

इस घटना का जो सबसे वीभत्स और शासकीय मर्यादा को तार-तार करने वाला पहलू सामने आया है, वह है कलेक्ट्रेट में मुस्तैद तहसीलदार मनीषा मिश्रा का कस्टमाइज्ड रवैया। जब बुजुर्ग जहर खाने के बाद कलेक्ट्रेट के फर्श पर तड़प रहे थे और अंतिम सांसें गिनते हुए कह रहे थे कि— “अब मेरी फरियाद कोई नहीं सुन रहा, मेरे जीने की चाहत खत्म हो गई है”, तब वहां उपस्थित तहसीलदार तड़प को विधिक रूप से संज्ञान में लेकर त्वरित चिकित्सा (First Aid) उपलब्ध कराने के बजाय उसे ‘नौटंकी’ और ‘लाइव ड्रामा’ करार देती रहीं।

डिजिटल साक्ष्यों (कैमरे) में कैद हुए वीडियो के अनुसार, तहसीलदार मनीषा मिश्रा मुख्य रूप से कहती सुनाई दे रही हैं— “ये तो बोतल है, ज़बरदस्ती कुछ भी…?”। एक राजपत्रित मजिस्ट्रियल पद पर बैठी महिला अधिकारी के मुंह से एक मरते हुए बुजुर्ग के प्रति ऐसे कड़े, संवेदनहीन और उपहासपूर्ण विधिक शब्द सुनकर कलेक्ट्रेट में मौजूद आम जनता और प्रबुद्ध जनों का खून खौल उठा।

विधिक जांच और दंडात्मक निलंबन की मांग; घिरे श्योपुर के आला अधिकारी

बुजुर्ग देवेंद्र गोयल की मौत के बाद श्योपुर के व्यापारिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के विधिक गेट पर एकत्र होकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह तीखा विधिक सवाल पूछा जा रहा है कि इस संस्थागत हत्या (Institutional Murder) का वास्तविक जिम्मेदार कौन है? वह कोतवाली पुलिस जो हफ्तों तक शिकायत को कस्टमाइज्ड रद्दी की टोकरी में दबाकर बैठी रही, वे कब्जाधारी जिन्होंने एक बुजुर्ग का आशियाना छीना, या कलेक्ट्रेट की वह जनसुनवाई व्यवस्था जहाँ एक जीवित नागरिक की विधिक अर्जी को कचरा समझा जाता है?

मामले की राष्ट्रीय स्तर पर हो रही किरकिरी को देखते हुए संभागायुक्त (कमिश्नर) और जिला दंडाधिकारी (Collector) ने तत्काल प्रभाव से मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) के विधिक आदेश जारी कर दिए हैं।

प्रशासनिक विधिक रुख: वरिष्ठ अधिकारियों का मत है कि वायरल वीडियो के विधिक साक्ष्यों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। लोक सेवक आचरण नियमावली (Conduct Rules) के घोर उल्लंघन और कर्तव्य के प्रति आपराधिक संवेदनहीनता बरतने के प्राथमिक साक्ष्य के आधार पर तहसीलदार मनीषा मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर मंत्रालय से संबद्ध करने की विधिक अनुशंसा भोपाल भेजी जा रही है। इसके साथ ही, पीड़ित की दुकान पर अवैध कब्जा करने वाले नामजद आरोपियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस को धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत कड़ा विधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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