Thursday, August 27, 2026
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HardaFarmersProtest: हरदा में गेहूं खरीदी पर महासंग्राम: स्लॉट सिस्टम से बेहाल किसान अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर पहुंचे जनसुनवाई; प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

HardaFarmersProtest: हरदा। मध्य प्रदेश के कस्टमाइज्ड कृषि अंचलों में शुमार हरदा जिले में इस रबी सीजन में गेहूं खरीदी की विधिक व्यवस्था प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ चुकी है। शासन द्वारा लागू किए गए ‘स्लॉट बुकिंग सिस्टम’ (Slot Booking System) की भारी अव्यवस्था और उपार्जन केंद्रों की सुस्ती से तंग आ चुके किसानों के सब्र का बांध आखिरकार मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान फूट पड़ा। चिलचिलाती धूप और नौतपा की भीषण गर्मी के बीच सैकड़ों की संख्या में पीड़ित किसान अपनी उपार्जित फसल (गेहूं) से लबालब भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर सीधे जिला पंचायत कार्यालय परिसर पहुंच गए। किसानों ने प्रशासनिक अमले के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उग्र प्रदर्शन किया। हालात की विधिक संवेदनशीलता तब और बढ़ गई जब प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त कई किसानों ने हाथ में कीटनाशक (पॉइजन) की बोतलें लहराते हुए सामूहिक आत्मदाह और आत्महत्या करने की विधिक चेतावनी दे डाली।

हफ्तों से लग रहे चक्कर, खुले में खराब हो रहा है गेहूं; रसूखदारों की फसल भी अटकी

जनसुनवाई परिसर में एकत्रित आक्रोशित किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि वे पिछले कई दिनों से स्थानीय उपार्जन और खरीदी केंद्रों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं।

  • अव्यवस्था की मार: ऑनलाइन पोर्टल पर न तो समय पर स्लॉट बुक हो पा रहे हैं और न ही केंद्रों पर मैन्युअल रूप से गेहूं की तुलाई व खरीदी की जा रही है। इसके चलते किसानों की महीनों की गाढ़ी कमाई और उपज खुले आसमान के नीचे कस्टमाइज्ड रूप से पड़ी हुई है, जो असमय मौसम बदलने पर पूरी तरह खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।

  • पूर्व मंत्री के भाई भी कतार में: इस प्रशासनिक कुप्रबंधन की विधिक पोल उस वक्त पूरी तरह खुल गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता व पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल के सगे छोटे भाई श्री रामशंकर पटेल (निवासी: ग्राम रातातलाई) की गेहूं की फसल भी इस अव्यवस्था के कारण नहीं बेची जा सकी। प्रशासनिक तंत्र की इस घोर सुस्ती से खफा होकर रामशंकर पटेल भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आम किसानों के हक में कतारबद्ध हुए और धरने पर बैठकर अपनी ही सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे विधिक सवाल दाग दिए।

संयुक्त कलेक्टर और तहसीलदार की विधिक समझाइश बेअसर; केवल आश्वासनों से त्रस्त अन्नदाता

जिला मुख्यालय पर अनाज से भरी ट्रॉलियों के जाम और किसानों के हाथ में कीटनाशक होने की विधिक सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त कलेक्टर और स्थानीय तहसीलदार दलबल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी किसानों को शांत कराने और उनकी विधिक तकनीकी समस्याओं का निराकरण शीघ्र करने का कड़ा आश्वासन दिया।

परंतु, बार-बार मिल रहे इन कागजी आश्वासनों से आजिज आ चुके किसान इस बार पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। किसानों का विधिक व व्यावहारिक तर्क बेहद साफ है कि जब फसल बेचने की अंतिम विधिक तिथियां नजदीक आ रही हैं और मौसम का मिजाज अनिश्चित है, तो अधिकारियों के इन मौखिक आश्वासनों से किसानों के आर्थिक नुकसान की भरपाई कैसे संभव होगी?

क्या बड़े आंदोलन की ओर बढ़ रहा है हरदा?

पूर्व कृषि मंत्री के भाई रामशंकर पटेल के इस प्रदर्शन में सीधे शामिल होने से यह साफ हो चुका है कि प्रशासनिक लापरवाही का दायरा इस बार इतना व्यापक है कि रसूखदार और प्रभावशाली किसान भी इसके विधिक दंश से अछूते नहीं रहे हैं। हरदा जिला प्रशासन के बड़े-बड़े दावों और गेहूं उपार्जन की तैयारियों की जमीनी हकीकत इस जनसुनवाई ने पूरी तरह बेपर्दा कर दी है। किसान संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर स्लॉट बुकिंग की विधिक तकनीकी खामी को दुरुस्त कर शत-प्रतिशत गेहूं की कस्टमाइज्ड खरीदी सुनिश्चित नहीं की गई, तो वर्तमान का यह आक्रोश एक बड़े और अनियंत्रित विधिक आंदोलन व चक्काजाम का रूप अख्तियार कर लेगा, जिसकी समस्त विधिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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