Tuesday, September 15, 2026
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बंगाल चुनाव खत्म होते ही I-PAC निदेशक को मिली जमानत! ED के रुख पर उठे सवाल, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और उसके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तार किए गए I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को अब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि सुनवाई के दौरान ED ने जमानत का विरोध नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने राहत देने का फैसला सुनाया।

चुनावी माहौल में हुई थी गिरफ्तारी

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई थी जब पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर था। I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट के लिए जानी जाती है और तृणमूल कांग्रेस के साथ लंबे समय से काम करती रही है।

चुनाव के बीच हुई इस कार्रवाई को लेकर उस समय TMC ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला था।

TMC ने लगाया था राजनीतिक दबाव का आरोप

तृणमूल कांग्रेस नेताओं का कहना था कि I-PAC के एक अहम अधिकारी की गिरफ्तारी का मकसद चुनावी अभियान को प्रभावित करना था।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक I-PAC केवल चुनावी रणनीति नहीं बनाती, बल्कि डेटा एनालिसिस, बूथ मैनेजमेंट, जमीनी फीडबैक और माइक्रो कैंपेनिंग में भी बड़ी भूमिका निभाती है। ऐसे में चुनाव के दौरान संगठन के प्रमुख चेहरे की गिरफ्तारी को TMC के लिए बड़ा झटका माना गया था।
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ED के रुख में बदलाव पर उठे सवाल

अब चुनाव खत्म होने के बाद उसी मामले में ED द्वारा जमानत का विरोध नहीं करना कई सवाल खड़े कर रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि मामला इतना गंभीर था कि चुनाव से पहले गिरफ्तारी जरूरी समझी गई, तो फिर चुनाव समाप्त होने के बाद एजेंसी का रुख नरम क्यों पड़ गया?हालांकि ED की ओर से इस बदलाव पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

कोर्ट में क्या हुआ?

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान विनेश चंदेल की ओर से नियमित जमानत याचिका दाखिल की गई थी।

उनके वकील विकास पाहवा ने बताया कि:

  • ED ने सुनवाई से एक दिन पहले अपना जवाब दाखिल किया
  • एजेंसी ने जमानत का विरोध नहीं किया
  • इसके बाद अदालत ने जमानत मंजूर कर ली

“इसे संयोग भी माना जा सकता है” – बचाव पक्ष

जब चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद जमानत मिलने को लेकर सवाल पूछा गया, तो बचाव पक्ष के वकील विकास पाहवा ने इसे संयोग बताया।

उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जमानत मिली है।

सियासी बहस तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों और TMC समर्थकों के बीच जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में हुई कार्रवाई और चुनाव समाप्त होते ही बदले रुख ने इस मामले को कानूनी से ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है।

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