PM मोदी बनाम ममता बनर्जी! बंगाल में झालमुड़ी vs सब्जी टोकरी… किसे मिलेगा जनादेश?

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण से पहले सोमवार को चुनाव प्रचार थम गया। अब 29 अप्रैल को आखिरी चरण का मतदान होगा, जबकि 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। लंबे और हाई-वोल्टेज चुनावी अभियान के बाद अब फैसला जनता के हाथ में है।

सियासी अखाड़ा बना बंगाल

15 मार्च से शुरू हुआ चुनावी अभियान पूरे राज्य को सियासी अखाड़े में बदल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 रैलियां और 3 रोड शो किए, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने 20 जनसभाओं और कई रोड शो के जरिए माहौल बनाया।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 30 से अधिक सभाएं और रोड शो कर सीधा जनसंपर्क साधा। टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने भी 50 से ज्यादा कार्यक्रमों के जरिए चुनावी रणनीति को धार दी।
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आस्था और राजनीति का मेल

इस चुनाव में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का खास महत्व देखने को मिला। पीएम मोदी ने काली मंदिर, दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ में दर्शन किए, तो अमित शाह ने गंगासागर और इस्कॉन मंदिर का दौरा किया।

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने चंडीपाठ और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी। यह साफ संकेत है कि बंगाल की राजनीति में आस्था भी एक अहम फैक्टर बन चुकी है।

‘झालमुड़ी’ vs ‘सब्जी टोकरी’ की सियासत

इस चुनाव में प्रतीकों की भी खास चर्चा रही। पीएम मोदी का झालमुड़ी खाना और आम लोगों से संवाद करना चर्चा में रहा। वहीं ममता बनर्जी बाजार में सब्जी खरीदते और महंगाई का मुद्दा उठाते नजर आईं।

इन दोनों छवियों ने चुनावी नैरेटिव को नया रंग दिया—एक तरफ आमजन से जुड़ाव, तो दूसरी ओर स्थानीय मुद्दों पर फोकस।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

चुनावी भाषणों में तीखे हमले भी देखने को मिले। बीजेपी ने विकास और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया, जबकि टीएमसी ने केंद्र पर हस्तक्षेप और महंगाई को लेकर निशाना साधा। दोनों दलों ने बूथ स्तर तक पहुंचकर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया, जिससे चुनाव और भी दिलचस्प हो गया।

अब जनता करेगी फैसला

लगभग डेढ़ महीने तक चले इस चुनावी महापर्व में रैलियां, रोड शो, धार्मिक यात्राएं और जनसंवाद के अलग-अलग तरीके देखने को मिले। अब 29 अप्रैल को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 4 मई को साफ हो जाएगा कि ‘परिवर्तन’ का नारा जीतता है या ‘निजेर मेये’ की रणनीति एक बार फिर सत्ता में वापसी कराती है।

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