Water Conservation Chhattisgarh : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा : रायगढ़ जिले के घरघोड़ा नगर की प्राचीन जल धरोहर और पर्यावरण का आधार रहे बगमूड़ा एवं छोटे मुड़ा तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। नगर की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले इन तालाबों की दुर्दशा से क्षुब्ध होकर आज बड़ी संख्या में नगरवासियों ने एकजुट होकर एसडीएम (राजस्व) और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
धरोहर बनी बीमारियों का केंद्र
ज्ञापन में नागरिकों ने बताया कि कभी नगर की प्यास बुझाने वाले और जल संरक्षण का मुख्य स्रोत रहे ये तालाब आज गंदगी, जलकुंभी और गाद से पट चुके हैं। तालाबों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि आसपास के मोहल्लों में भयंकर दुर्गंध फैल रही है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
नगरवासियों का आरोप है कि तालाबों की सफाई के नाम पर केवल समय-समय पर ‘दिखावा’ किया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की ओर किसी का ध्यान नहीं है। सबसे ज्यादा नाराजगी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सत्ता पक्ष के नेताओं के खिलाफ देखी जा रही है। नागरिकों का कहना है कि इसी क्षेत्र से बड़े नेता होने के बावजूद इस ऐतिहासिक धरोहर की उपेक्षा समझ से परे है। मंचों से पर्यावरण और विकास की बातें करने वाले जिम्मेदार आज अपनी ही आंखों के सामने नष्ट हो रहे तालाबों पर मौन साधे बैठे हैं।
स्थायी समाधान की मांग
नगरवासियों ने प्रशासन से केवल खानापूर्ति न कर ठोस कार्रवाई की मांग की है, जिसमें प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- तालाबों की पूरी तरह गहरी खुदाई और गाद निकालना।
- जलकुंभी और कचरे का स्थायी निपटान।
- तालाब के चारों ओर प्रकाश व्यवस्था, हरियाली और सौंदर्यीकरण।
- जल संरक्षण के लिए प्रभावी कार्ययोजना का निर्माण।
नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही स्थल निरीक्षण कर कार्य शुरू नहीं किया, तो नगरवासी चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।











