सुप्रीम कोर्ट सख्त : मतदाता सूची पर चुप क्यों हैं राजनीतिक दल – सभी 12 पार्टियों से मांगा जवाब

VIKASH KHALKHO

नई दिल्ली : बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजनीतिक दलों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के बार-बार आग्रह के बावजूद किसी भी पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई, जबकि 2.63 लाख नए मतदाताओं ने स्वयं आवेदन किया है। जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि “ऐसा लगता है कि मतदाता राजनीतिक दलों से ज्यादा जागरूक हैं।”

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सुनवाई में चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 65 लाख नामों की बूथ-वार जानकारी और हटाए जाने के कारण वेबसाइट व जिला स्तर पर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। आयोग ने कहा कि इसमें 22 लाख मृतक, 8 लाख डुप्लिकेट और करीब 35 लाख ऐसे लोग शामिल हैं, जिनकी दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया अभी बाकी है।

कोर्ट ने जब पूछा कि 12 पंजीकृत दलों में से कितनों ने इस मामले पर आपत्ति जताई, तो आयोग ने जवाब दिया—“कोई नहीं।” आयोग ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों के पास 1.61 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं, जिनमें से कोई भी ड्राफ्ट लिस्ट पर लिखित आपत्ति लेकर सामने नहीं आया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आश्चर्य जताया और कहा कि अगर पार्टियां अपनी जिम्मेदारी निभातीं तो हालात बेहतर होते। जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच इतनी दूरी क्यों है। उन्होंने साफ किया कि कोर्ट सभी 12 राजनीतिक दलों से जवाब मांगेगा।

सुनवाई में आरजेडी की ओर से कपिल सिब्बल और सात अन्य पार्टियों की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि वे आरजेडी के लिए पेश हो रहे हैं, जबकि सिंघवी ने बताया कि कई अन्य दल भी इस मुद्दे से जुड़े हैं। दूसरी ओर आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि पार्टियां केवल “हल्ला मचा रही हैं” लेकिन जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं कर रहीं।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर और प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि आयोग सही तरीके से काम नहीं कर रहा और मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रवासी मजदूर, बाढ़ प्रभावित लोग और अन्य कारणों से प्रभावित मतदाता दावे दर्ज नहीं करा पाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को सख्त चेतावनी दी और कहा कि वह इस मामले की निगरानी करता रहेगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जिन लोगों के नाम सूची से बाहर किए गए हैं, उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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