sukma News: कृष्णा नायक/ सुकमा : सुकमा:- सुकमा जिला प्रशासन के ‘स्किल डेवलपमेंट’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के विजन को धरातल पर उतारते हुए कोण्टा ब्लॉक मुख्यालय में स्थित शासकीय बालक हाईस्कूल (पोटाकेबिन) ने एक सराहनीय उदाहरण पेश किया है। यहाँ के प्राचार्य और शिक्षकों ने सीमित संसाधनों और पानी की कमी के बावजूद ‘वेस्ट वाटर मैनेजमेंट’ की ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसने न केवल 100 पौधों को जीवनदान दिया है, बल्कि छात्रों के लिए व्यावहारिक शिक्षा का एक नया द्वार भी खोल दिया है।
sukma News: बेकार बहते पानी का मास्टर प्लान
sukma News: संस्था परिसर के समीप स्थित एकलव्य विद्यालय से व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को सहेजने के लिए प्राचार्य ने एक अनूठी कार्ययोजना बनाई। संसाधनों की कमी को आड़े न आने देते हुए, प्राचार्य और उनके सहयोगी शिक्षकों ने ‘कबाड़ से जुगाड़’ तकनीक का उपयोग किया। इसमें पुराने बेकार पड़े पाइपों और मात्र आधे हॉर्सपावर के टुल्लू पंप के मेल से एक प्रभावी ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) सिस्टम तैयार किया गया।
sukma News: छात्रों के लिए ‘लाइव लैब’ बना स्कूल
sukma News: यह प्रयास केवल पौधों को पानी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के कौशल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। छात्र अब अपने घरों और किचन गार्डन में नालों के व्यर्थ पानी का उपयोग कर सब्जी उत्पादन की तकनीक सीख रहे हैं। यह नवाचार बच्चों में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और व्यावसायिक कृषि के प्रति रुचि जगा रहा है।
sukma News: प्रशासन का दृष्टिकोण: ईको-फ्रेंडली वातावरण और स्किलिंग
sukma News: संस्था के इस सामूहिक प्रयास से स्कूल परिसर ‘ईको-फ्रेंडली’ जोन में तब्दील हो गया है। प्रशासन ऐसे प्रयासों की सराहना करता है, क्योंकि यह न केवल सरकारी योजनाओं को सफल बनाते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग की प्रेरणा भी देते हैं।











