सिंगरौली। मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण को लेकर सरकार लगातार योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा कर रही है, लेकिन सिंगरौली जिले से सामने आई स्थिति इन दावों की जमीनी सच्चाई पर सवाल खड़े कर रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के आंकड़ों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने न आने से चर्चा तेज हो गई है।
शुक्रवार को बिलौजी स्थित अटल सामुदायिक भवन में समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र, छतरपुर द्वारा “पर्पल फेयर” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही, जहां मंच से दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया। हालांकि, जिले में अब तक कितने दिव्यांगों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल या अन्य सहायक उपकरण मिले—इस पर स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आ सके।
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ग्रामीण क्षेत्रों में लाभ पहुंचने पर सवाल
स्थानीय स्तर पर कई दिव्यांगजनों का कहना है कि योजनाओं की जानकारी तो दी जाती है, लेकिन वास्तविक लाभ पाने के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीण अंचलों में रहने वाले जरूरतमंदों को अब भी सहायक उपकरणों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
कार्यक्रम बनाम जमीनी हकीकत
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन जागरूकता बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। यदि लाभार्थियों की पहचान, वितरण प्रक्रिया और निगरानी पारदर्शी नहीं होगी, तो सशक्तिकरण के लक्ष्य अधूरे रह सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग लाभार्थियों के आंकड़े सार्वजनिक करता है या नहीं, और ग्रामीण दिव्यांगजनों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाते हैं।











