नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की बैठक में बुधवार रात तक जबरदस्त ड्रामा चला। विपक्षी राज्यों—कर्नाटक, केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल—ने दरों में कटौती का विरोध कर दिया। हालात इतने बिगड़े कि वोटिंग तक की नौबत आ गई, जो जीएसटी परिषद के इतिहास में दूसरी बार होता।
पीएम और शाह का होमवर्क
दरअसल, जीएसटी दरों में राहत का खाका छह महीने पहले से तैयार था। पीएम मोदी ने साफ निर्देश दिए थे कि आम और मध्यमवर्ग को सीधी राहत मिले। गृह मंत्री अमित शाह ने भी संवेदनशील वस्तुओं पर विवाद रोकने के लिए राज्यों से अलग-अलग बातचीत की थी।
बैठक में अड़चन और समाधान
3 सितंबर को हुई बैठक शाम 7 बजे खत्म होनी थी, लेकिन कर्नाटक और केरल अपनी शर्तों पर अड़े रहे। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने वोटिंग कराने का सुझाव दिया। यह सुनकर विपक्षी राज्यों को डर हुआ कि जनता नाराज़ हो सकती है। आखिरकार पश्चिम बंगाल ने दखल देकर कर्नाटक और केरल को मनाया और देर रात आम सहमति बन पाई।
वित्त मंत्री का भरोसा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों का पैसा एक ही है। अगर नुकसान होगा तो सबका होगा, लेकिन अभी प्राथमिकता जनता को राहत देना है। उन्होंने राज्यों को भरोसा दिलाया कि राजस्व के नुकसान की भरपाई की जाएगी।











