निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुंगेली जिले के चर्चित पॉक्सो मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पीड़िता के नाबालिग होने के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद न हों।
ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को असंगत बताते हुए उसे निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। न्यायालय ने पूरे मामले की परिस्थितियों और साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद यह निर्णय लिया।
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क्या था पूरा मामला?
यह मामला 13 सितंबर 2022 का है, जब मुंगेली जिले की एक नाबालिग लड़की स्कूल जाने के लिए घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अपहरण की आशंका जताई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
मोबाइल बातचीत और सहमति बनी अहम कड़ी
जांच के दौरान यह सामने आया कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से मोबाइल पर बातचीत होती थी। पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि वह आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई थी। यह तथ्य केस की दिशा बदलने में अहम साबित हुआ।











